राजस्थान में अलवर और अजमेर लोकसभा सीट पर उपचुनाव का एलान

नई दिल्ली। राजस्थान की दो लोकसभा सीटों अलवर और अजमेर पर 29 जनवरी को उपचुनाव होगा। इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव को राजस्थान विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इस चुनाव को राजस्थान की वसुंधरा सरकार का इम्तेहान माना जा रहा है।

राज्य में भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बन गए उपचुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबला होगा। जहाँ कांग्रेस गुजरात चुनाव परिणामो से आत्मविश्वास से भरी है वहीँ भारतीय जनता पार्टी के लिए दोनो सीटें बचाना प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

अलवर सीट को यादव बाहुल्य माना जाता है। यहाँ भाजपा किसी दमदार यादव प्रत्याशी की तलाश में है। इस मामले में कांग्रेस ने पहल कर यादव उम्मीदवार की घोषण कर भाजपा को संकट में डाल दिया है।

कांग्रेस ने लोकसभा की दोनों सीटों के साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा सीट को लेकर सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का कहना है कि जनता वसुंधरा सरकार से तंग आ गई है और बदलाव के मूड में है। इसी के चलते अब प्रदेश भाजपा और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शरण में जा रहे हैं।

पायलट का कहना है कि उपचुनावों के दौरान ही प्रदेश भाजपा ने राज्य में दो बडेÞ कार्यक्रम रख प्रधानमंत्री मोदी को बुलाया है। इससे ही साबित होता है कि प्रदेश सरकार अपने बूते उपचुनावों में जनता का सामना नहीं कर सकती है।

पायलट का कहना है कि मुख्यमंत्री की कोई साख जनता के बीच नहीं बची है। और प्रदेश भाजपा के नेताओं की जनता के बीच जाने की हिम्मत ही नहीं है। प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में जो हताशा का माहौल है, उससे ही सरकार घबरा गई है।

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में अलवर और अजमेर दोनो सीटों पर बीजेपी उम्मीदवार विजयी हुए थे लेकिन इस बार स्थति 2014 से बदली हुई है। राज्य में सरकार विरोधी माहौल है। इसलिए इस बार बीजेपी के लिए पीएम मोदी के नाम से सहारे चुनावी नैया पार कर पाना आसान नहीं होगा।

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