राजस्थान: बूथ लेबिल पर बीजेपी के पर कतरने को कांग्रेस ने बनायीं ये ख़ास रणनीति

नई दिल्ली। राजस्थान में इस वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनावो में कांग्रेस नई रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। बीजेपी के बूथ लेबिल मैनेजमेंट को धराशाही करने के लिए कांग्रेस ने घेराबंदी शुरू कर दी है।

राजस्थान में कांग्रेस ने मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान की शुरुआत करके बीजेपी को उसी के तरीके से चुनौती देने का मन बना लिया है। पिछले दस वर्षो में बूथ मैनेजमेंट में पिछड़ी कांग्रेस इस बार बूथ मैनेजमेंट को लेकर बेहद गंभीर है।

बीजेपी के बूथ मैनेजमेंट में पन्ना प्रमुखों की भूमिका को देखते हुए कांग्रेस ने एक बूथ कार्यकर्त्ता को 40 घर बचाने की ज़िम्मेदारी दी है। यानि एक बूथ कार्यकर्त्ता करीब 160 मतदाताओं तक सीधे सम्पर्क में रहेगा। इतना ही नहीं कांग्रेस ने मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान के तहत राज्य के 48000 बूथों की निगरानी और मैनेजमेंट के लिए रणनीति तैयार कर ली है।

चुनावी विशेषज्ञों की माने तो यदि 2014 के लोकसभा चुनावो में भी कांग्रेस ने देशभर में बूथ मैनेजमेंट के लिए इतनी गंभीरता दिखाई होती तो आज उसकी स्थति काफी बेहतर होती। गुजरात विधानसभा चुनावो के दौरान कांग्रेस ने बूथ मैनेजमेंट को लेकर काफी गंभीरता से काम शुरू किया था जो पिछले चुनावो में नहीं हुआ था।

जानकारों की माने तो बूथ स्तर पर मैनेजमेंट की रणनीति बनाने का श्रेय कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अशोक गहलोत को जाता है। गुजरात विधानसभा चुनावो के दौरान राज्य के प्रभारी रहे अशोक गहलोत ने ही गुजरात में बूथ लेबिल मैनेजमेंट का काम शुरू कराया था। नतीजतन गुजरात विधानसभा चुनावो में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ।

चुनावी जानकारों की माने तो चुनाव में बूथ मैनेजमेंट बेहद अहम भूमिका अदा करता है। बीजेपी की बड़ी कामयाबी के पीछे उसके बूथ लेबिल कार्यकर्ताओं (पन्ना प्रमुख) का हाथ माना जाता रहा है। कांग्रेस की नई रणनीति को देखकर लगता है कि बीजेपी की नब्ज़ पकड़कर चल रही कांग्रेस अब बूथ लेबिल पर ही बीजेपी को मात देने का मन बना चुकी है।

राजस्थान में कांग्रेस के मेरा बूथ मेरा अभियान को खासी सफलता मिल रही है। जानकारों की माने तो चुनाव में किसी पार्टी की जीत हार और उसका प्रदर्शन उसके बूथ लेबिल मैनेजमेंट पर निर्भर करता है। जानकारों के अनुसार कोई भी पार्टी चुनाव में सभी मतदाताओं तक नहीं पहुँच सकती, ऐसे में बूथ लेबिल मैनेजमेंट को बेहद अहम माना जाता है।

क्या करते हैं बूथ कार्यकर्त्ता :

चुनावी विशेषज्ञों की माने तो एक बूथ कार्यकर्त्ता को करीब 30 से 40 घरो की ज़िम्मेदारी दी जाती है। यह बूथ कार्यकर्ताओं की तादाद पर निर्भर करता। यानि एक कार्यकर्त्ता 100 से 150 मतदाताओं के सम्पर्क में रहता है।

बूथ कार्यकर्ताओं पर बड़ी ज़िम्मेदारी घर घर जाकर पार्टी और उम्मीदवार के बारे जानकारी देने से लेकर, बूथ स्तर पर मतदाता सूचियों के आंकलन का काम होता है। बूथ कार्यकर्त्ता ही बताते हैं कि मतदाता सूची में शामिल नामो में कोई फ़र्ज़ी नाम तो नहीं है , या किसी ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल तो नहीं जिसकी मौत हो चुकी हो।

इतना ही नहीं बूथ कार्यकर्त्ता स्थानीय स्तर पर लोगों से मिलकर मुद्दे तलाशते हैं, बूथ कार्यकर्ताओं की फीडबैक के आधार पर ही प्रत्याशी स्थानीय स्तर पर अपना घोषणा पत्र तैयार करता है।

चुनाव सामिग्री से लेकर वोटिंग की पर्ची तक मतदाताओं को घर पर पहुँचाने का काम भी बूथ लेबिल कार्यकर्त्ता ही करते हैं। नुक्क्ड़ सभाओं से लेकर बड़े नेताओं की सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए भी बूथ लेबिल कार्यकर्त्ता अहम भूमिका अदा करते हैं।

मतदान के दिन मतदाताओं को घर से बूथ तक लाने में भी बूथ कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होती है। वे बूथों पर तैनात रहते हैं और इस बात की जानकारों रखते हैं कि कौन सा वोटर अभी वोट नहीं डालने आया है।

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