राजस्थान और तेलंगाना में प्रचार थमा, पढ़िए- क्या हैं समीकरण

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का काम मंगलवार शाम को पूरा हो गया। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावो को अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावो का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में इन चुनावो को पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिए अग्नि परीक्षा माना जा रहा है।

राजस्थान में सत्ताधारी होने के चलते बीजेपी को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह सरकार विरोधी हवा का सामना करना पड़ रहा है। वहीँ इस बार कांग्रेस के अलावा बीजेपी के अपने बागी भी उसके लिए सिरदर्द साबित हो रहे है। नतीजतन राजस्थान के कई इलाको में बीजेपी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

इस बार अहम बात यह देखने को मिली है कि जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं वहां बीजेपी पिछले चुनावो की तरह आक्रामक दिखाई नहीं दे रही। बीजेपी के शीर्ष नेताओं के दावों में से इस बार पहले जैसा भरोसा दिखाई नहीं दे रहा। चुनावी प्रचार में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना पसीना अवश्य बहाया लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी की सभाएं पिछले चुनावो की तादाद में कम आयोजित की गयीं।

पिछले दो महीनो में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के क्रम में दो महीने में करीब 68 हजार किमी. की यात्रा, 68 जनसभा, एक दर्जन से अधिक रोड-शो, दर्जन भर से अधिक संवाद कांर्यक्रम किए।

वहीँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम को मिलाकर कुल 26 जनसभाएं कीं। इनमें सबसे अधिक 12 राजस्थान में ही कीं हैं।

इस बार चुनाव प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अकेले ही बीजेपी की पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी को पछाड़ दिया है। राहुल गांधी ने दो महीने के दौरान चुनाव प्रचार के लिए करीब 73 जनसभा, एक दर्जन रोड शो और इसी के आसपास संवाद कार्यक्रम किये ।

फिलहाल सभी की नज़रें 11 दिसंबर पर टिकी हैं, जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित किये जायेंगे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावो के परिणाम जहाँ देश में कांग्रेस की स्थति वहीँ मोदी सरकार के कामकाज पर जनता की राय साबित होंगे।

क्या है राजस्थान की चुनावी स्थति :

राजस्थान में कुल 200 विधानसभाएं हैं। इनमे 199 विधानसभाओं के लिए 7दिसंबर को मतदान होगा। अलवर की रामगढ़ सीट पर बसपा उम्मीदवार के निधन के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि 199 सीटों पर 2,274 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 189 महिलाएं।

क्या हैं राजस्थान के समीकरण :

राजस्थान की 130 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बताया जा रहा है। करीब 50 सीटों पर दोनों दलों के लिए बागियों ने मुसीबत खड़ी कर रही है।

जाट समुदाय से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 33-33 प्रत्याशियों को खड़ा किया है। भाजपा ने राजपूत समाज के 26 लोगों को उम्मीदवारी दी है, जबकि कांग्रेस ने इस समाज के एक दर्जन लोगों को प्रत्याशी बनाया है। राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से करीब 60 पर जाट मतदाता प्रभावी हैं।

क्या है तेलंगाना की चुनावी स्थति :

तेलंगाना में 7 दिसंबर को होने जा रहे 119 विधानसभाओ के चुनाव के लिए कुल 1,821 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सत्तारूढ़ है।

तेलंगाना में इस बार कांग्रेस और तेलगुदेशम पार्टी ने अपनी 37 वर्षो पुरानी प्रतिद्वंद्विता भुलाकर गठबंधन किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस और तेलगुदेशम पार्टी के अलावा मुस्लिम लीग, सीपीआइ और टीजेएस भी शामिल हैं।

राज्य में सत्तारूढ़ टीआरएस की मुश्किल यह है कि उसे कांग्रेस और बीजेपी की तरफ से दोतरफा हमले झेलने पड़े हैं। वहीँ कांग्रेस और तेलगुदेशम पार्टी के बीच अचानक हुए गठबंधन ने राज्य की राजनैतिक तस्वीर बदल दी है।

क्या है तेलंगाना के समीकरण :

तेलंगाना में इस बार हालात पिछले चुनावो की तुलना में काफी बदले हुए हैं। टीजेएस के कांग्रेस, टीडीपी गठबंधन में शामिल होने के बाद राज्य की चुनावी तस्वीर पिछले चुनावो से बेहद अलग बन चुकी है।

गौरतलब है कि टीजेएस के संस्थापक एम. कोदांदरम तेलंगाना राज्य आंदोलन के दौरान मौजूदा मुख्यमंत्री और टीआरएस सुप्रीमो चंद्रशेखर राव के साथी थे और उन्होंने अलग राज्य तेलंगाना के लिए हुए आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी।

कांग्रेस इस बार 94 सीटों पर लड़ रही है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी जिसने 2014 के विधानसभा चुनाव में 15 सीटें जीती थी, इस बार 13 उम्मीदवार उतारे हैं।

2014 के विधानसभा चुनाव में टीआरएस को 33 फीसदी वोट के साथ 63 सीटें मिली थी। 24 फीसदी वोट के साथ कांग्रेस ने 21 सीटें जीती थी। टीडीपी और उसकी तब की सहयोगी भाजपा ने 21 फीसदी वोट के साथ (टीडीपी 14+भाजपा 7) क्रमशः 15 और 5 सीटें जीती थी।

राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक मतदाताओं का ध्रुवीकरण किसी भी विधानसभा सीट पर निर्णायक साबित हो सकता है। पिछले चुनाव में सत्तारूढ़ टीआरएस को तेलंगाना आंदोलन से जुड़े होने का भरपूर फायदा मिला था लेकिन इस बार स्थति पहले से भिन्न है।

जानकारों की माने तो इस बार हो रहे विधानसभा चुनावो में टीआरएस को कांग्रेस और टीडीपी गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है और यह चुनौती जीत हार भी तय कर सकती है।

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