रमजान में चुनाव: मुस्लिम नेताओं ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद अब मुस्लिमो के पवित्र महीने रमजान के दौरान होने वाले मतदान को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा तय किये कार्यक्रम में चार चरण ऐसे हैं जिनमे मतदान की तारीखे रमजान के दौरान आ रही हैं। रोजे के दौरान देश में 6 मई, 12 मई व 19 मई को मतदान रखा गया है । मुस्लिम नेताओं का कहना है कि रमजान के चलते मुस्लिम मतदाताओं को परेशानी होगी।

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने चुनाव आयोग से मुसलमानों की भावना का खयाल रखने और चुनाव तिथि रमजान माह से पहले या बाद में करने की मांग की है। रविवार देर रात बयान को जारी कर मौलाना खालिद रशीद फ रंगी महली ने कहा, 5 मई को मुसलमानों के सबसे पवित्र महीना रमजान का चांद देखा जाएगा। चांद दिख जाता है तो 6 मई को पहला रोजा होगा।

वहीँ दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने भी रमजान के दौरान मतदान पर नाखुशी ज़ाहिर की है। उनका कहना है कि चुनाव के समय मुस्लिमों का रोजा होगा। इस बात पर चुनाव आयोग को ध्यान देना चाहिए था।

हाकिम ने कहा, ‘चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और हम उसका सम्मान करते हैं। हम उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलना चाहते हैं। लेकिन 7 चरणों में चुनाव बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए मुश्किल होगा। यह उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल होगा जिनका उस समय रमजान चल रहा होगा।’

उन्होंने कहा, ‘इन तीन राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है। वह रोजा रखकर वोट डालेंगे। चुनाव आयोग को इस बात को अपने दिमाग में रखना चाहिए। भाजपा चाहती है कि अल्पसंख्यक अपना वोट न डालें। लेकिन हम इससे चिंतित नहीं हैं। लोग भाजपा हटाओ-देश बचाओ को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’

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