बड़ी खबर

ये है बिजनौर काण्ड का सच

नई दिल्ली। पिछले दिनों बिजनौर में चलती ट्रेन में एक मुस्लिम महिला से साथ जीआरपी के सिपाही द्वारा रेप किये जाने के बाद मीडिया में लगातार भ्रामक ख़बरें आ रही हैं। कई खबरों में यह दावा किया गया है कि महिला ने अपनी तहरीर और कोर्ट में दिए गए बयान में रेप का ज़िक्र नहीं किया है।

इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर एक विशेष मानसिकता के लोगों द्वारा वायरल की जा रही खबरों में मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया जा रहा है कि पीड़ित महिला की मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई और महिला ने कोर्ट में अपने बयान में रेप के विषय में नहीं कहा।

चश्मदीद का बयान :
इस मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी उमेश कुमार ने कहा कि जब वह उस डिब्बे में बैठने गया तो कमल शुक्ला ने उसे नीचे उतार दिया और गेट बंद कर लिया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार लड़की उसी डिब्बे में चढ़ी थी। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार रास्ते में और दो स्टेशनों पर ट्रेन रुकी लेकिन वहां से कोई सवारी नहीं चढ़ी लेकिन जब बिजनौर आया तो मैंने गार्ड से कहा कि मेरे पास बिकलांग होने का पास है फिर भी मुझे पुलिस वाले ने नीचे उतार कर गेट बंद कर लिया। जब हम गार्ड के डिब्बा खुलवाने पहुंचे तो वह लड़की से रेप कर चूका था। उसकी पेंट उतरी हुई थी।

गार्ड का बयान :
इस मामले में एक और प्रत्यक्ष दर्शी स्वयं ट्रेन का गार्ड है। गार्ड ने कहा कि जब अगले स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो लोग उस डिब्बे में चढ़ने के लिए पहुंचे जिसे कमल शुक्ला ने अंदर से बंद कर रखा था। कमल शुक्ला ने कोच का दरवाज़ा नहीं खोला तो लोगों ने गार्ड को बुलाया। गार्ड के मुताबिक जब वह दरवाजा खुलवाने पहुंचे तो भीड़ के दबाव में कमल शुक्ला को दरवाज़ा खोलना पड़ा। गार्ड के मुताबिक उस समय लड़की रो रही थी और चीख रही थी कि उसे बचाओ और कमल शुक्ला की पेंट उतरी हुई थी, वह कमीज के नीचे बिलकुल नंगा था।

इसके बाद जब महिला ने रोते हुए कहा कि कमल शुक्ला ने उसके साथ बलात्कार किया है तो भीड़ ने कमल शुक्ला को डिब्बे से नीचे खीच कर उसकी धुनाई करना शुरू कर दिया।

भ्रामक ख़बरें:

बिजनौर रेप काण्ड में आरोपी कमल शुक्ला को बचाने के लिए भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। इन भ्रामक खबरों में उसके नाना का नाम भी लिया जा रहा है। सोशल मीडिया में पीड़ित महिला के नाना के हवाले से कहा गया कि वह महिला चरित्र हीन थी। खबर की पड़ताल करने पर यह खबर झूठी निकली।

वहीँ कुछ समाचार पत्रों में यह खबर प्रकशित हुई कि पीड़ित महिला की मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। इतना ही नहीं समाचार पत्रों में दावा किया गया कि महिला द्वारा दी गयी तहरीर में रेप का ज़िक्र नहीं है।

तहरीर की प्रति हम नीचे प्रकाशित कर रहे हैं जिसमे साफ़ तौर पर महिला ने अपने साथ जीआरपी सिपाही द्वारा जोर ज़बरदस्ती की बात का उल्लेख किया है। इतना ही नहीं कई समाचार पत्रों में पीड़ित महिला की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर दावा किया गया कि महिला तलाकशुदा होने के बावजूद तीन माह की गर्भवती है।

सच क्या है :

इस मामले को ट्विस्ट देने के लिए नई नई कहानियां गढ़ी जा रही हैं। आरोपी कमल शुक्ला को बचाने में जुटी भगवा ब्रिगेड नए नए जाल बुन रही है। कभी वह वर्षो पहले मर चुके नाना का हवाला देकर महिला को चरित्र हीन साबित करने की कोशिश करती है तो कभी तहरीर में रेप का ज़िक्र होने का दावा करती है। फिलहाल सच्चाई यही है कि महिला से रेप का आरोपी कमल शुक्ला जेल की हवा खा रहा है लेकिन पीड़ित महिला पर दबाव बनाये जाने की कोशिश भी की जा रही है कि वह अपना बयान बदल दे और सुलह कर ले।

बड़ा सवाल :
यदि पीड़ित महिला झूठ बोल रही है तो सिपाही कमल शुक्ला ने ट्रेन का डिब्बा अंदर से बंद क्यों किया ?
यदि कमल शुक्ला निर्दोष है तो जब लोगों ने डिब्बे का दरवाज़ा खुलवाया तो उसकी पेंट कहाँ थी ? वह नंगा क्यों था ?
यदि महिला के साथ रेप नहीं हुआ था तो वह रो क्यों रही थी ?

ये तीन सवालो के जबाव आपको सच्चाई की तह तक ले जायेंगे। आप खुद इन तीन सवालो के जबाव खोजिये और तय करिये।

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