यूपी में कांग्रेस से गठबंधन होने पर फायदे में बसपा, गठबंधन से बाहर रहेगी सपा !

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावो में विपक्ष के महागठबंधन पर खतरे के बादल मडराते नज़र आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सिर्फ बसपा से गठबंधन करना चाहती और कांग्रेस को बाहर रखना चाहती है।

पार्टी सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की स्थति में उसे सिर्फ रायबरेली और अमेठी सीट ही देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक सपा इस प्रस्ताव को जल्द ही कांग्रेस को भेजने वाली है। इस प्रस्ताव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में दो सीटें ऑफर की जा रही हैं।

वहीँ 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावो में सीटों के बंटवारे के समय समाजवादी पार्टी की पैतरेबाजी झेल चुकी कांग्रेस पहले से ही चौकन्नी है। पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी का साथ नहीं चाहती और वह बसपा को गठबंधन के लिए प्रदेश की आधे से अधिक लोकसभा सीटें यानि करीब पचास सीटें तक ऑफर कर सकती है।

फिलहाल बहुजन समाज पार्टी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गयी है। बसपा सुप्रीमो मायावती को तय करना है कि वे अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से गठबंधन करके उत्तर प्रदेश तक सीमित रहना पसंद करेंगी या राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस से गठबंधन करके अन्य राज्यों में भी गठबंधन के तहत अपने उम्मीदवार उतारेंगी।

वैसे समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर हर तरह के हाथ पैर मार रही है। हाल ही में सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा से गठबंधन की शर्त पर कम सीटों पर भी समझौता करने के इरादे जताये थे।

फूलपुर,गोरखपुर और नूरपुर में हुए उपचुनाव में सपा उम्मीदवारों की जीत से बसपा के प्रति उम्मीद लगाए बैठे अखिलेश यादव के ऊपर बसपा के साथ गठबंधन को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। अखिलेश यादव अब समझ चुके हैं कि केवल यादव मतदाताओं के सहारे नैया पार लगना सम्भव नहीं है। चुनाव जीतना है तो दलित और मुस्लिम मतदाताओं के मत हासिल करना भी बेहद ज़रूरी है।

वहीँ पहले से चौकन्नी बैठी कांग्रेस आज मध्य प्रदेश के बसपा अध्यक्ष का बयान आने के बाद मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर बसपा से बातचीत शुरू करने जा रही है। बता दें कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ने आज कहा कि उनके पास हाईकमान की तरफ से गठबंधन को लेकर कोई निर्देश नहीं आये हैं। इसलिए बसपा प्रदेश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी।

वहीँ समाजवादी पार्टी पहले ही मध्य प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है। ऐसे में यदि कांग्रेस बसपा के बीच गठबंधन नहीं हुआ तो मतों के विभाजन का फायदा बीजेपी को होगा। पिछले चुनावो में मध्य प्रदेश में बसपा ने चार सीटें जीती थीं और उसके 8 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे।

फिलहाल सभी की नज़रें सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे पर टिकी हैं। सपा सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव कल दिल्ली पहुँच रहे हैं और वे करीब 3 दिनों तक दिल्ली में ही रहेंगे। माना जा रहा है कि वे अपने दिल्ली प्रवास के दौरान गठबंधन को लेकर कई अन्य दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से बहुजन समाज पार्टी से मध्य प्रदेश में गठबंधन को लेकर कल शाम तक तस्वीर साफ़ होने की उम्मीद है। सूत्रों की माने तो सामान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन को लेकर पार्टी आलाकमान ने राज्य के नेताओं से जानकारी तलब की है।

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