यूपी निकाय चुनाव का कड़वा सच: ईवीएम से जीते, वैलेट पेपर से हारे

लखनऊ ब्यूरो: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावो में मेयर की 16 में 14 सीटें जीतने वाली बीजेपी दावे कुछ भी करे लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि जहाँ जहाँ वैलेट पेपर से चुनाव हुए वहां उसे बम्पर सफलता नहीं मिली। बता दें कि उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावो में नगर निगमों में ईवीएम तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतो में वैलेट पर चुनाव हुए थे।

अहम सवाल यही है कि जिन सीटों पर बीजेपी मेयर का चुनाव जीती वहां की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतो में क्यों हारी ? भारतीय जनता पार्टी ने 16 में से 14 निगमों में मेयर की सीट जीती जो 87.5 % है। 1300 पार्षदों में से 596 पार्षद पदों पर विजय हासिल की जो 45.85% है। इन सभी पर ईवीएम से चुनाव हुआ था।

वहीँ 198 नगर पालिकाओं में बीजेपी ने 70 नगर पालिकाएं जीतीं जो 35.35 प्रतिशत होता है। वहीँ 5261 नगर पालिका सदस्यों में सिर्फ 922 पर जीत मिली जो कि 17.53 प्रतिशत होता है। वहीँ 438 नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी ने सिर्फ 100 पंचायतो में चुनाव जीता जो कि 22.83 प्रतिशत होता है तथा नगर पंचायत सदस्यों की कुल 5434 सीटों में से बीजेपी को मात्र 664 सीटों पर सफलता मिली है जो मात्र 12.22% होता है।

मेयर : कुल सीटें: 16

बीजेपी: 14

जीत का प्रतिशत: 87. 5%


पार्षद : कुल सीटें: 1300

बीजेपी: 596

जीत का प्रतिशत: 45.85%


नगर पालिका अध्यक्ष:

कुल सीटें: 198

बीजेपी: 70

जीत का प्रतिशत: 35.35%


नगर पालिका सदस्य:

कुल सीटें: 5261

बीजेपी: 922

जीत का प्रतिशत: 17.53%


नगर पंचायत अध्यक्ष:

कुल सीटें: 438

बीजेपी: 100

जीत का प्रतिशत: 22.83%


नगर पंचायत सदस्य:

कुल सीटें: 5434

बीजेपी: 664

जीत का प्रतिशत:12.22%

उपरोक्त परिणामो को देखकर यह कहा जा सकता है कि निकाय चुनावो में किसी पार्टी की हवा नहीं थी। यदि हवा होती तो नगर पालिकाओं और नगर पंचायतो में भी बीजेपी बम्पर सीटें मिलनी चाहियें थीं।

पूरे परिणामो को देखकर कहा जा सकता है कि कारण जो भी रहे हों लेकिन जहाँ ईवीएम का इस्तेमाल हुआ वहां बीजेपी को बम्पर जीत मिली है तथा जहाँ वैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ वहां वहां बीजेपी रफ़्तार नहीं पकड़ सकी है।

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