यूपी: एक सप्ताह में बसपा के तीन कद्दावर नेताओं की हत्या के पीछे कौन ?

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में पिछले पांच दिनों में बहुजन समाज पार्टी के तीन कद्दावर नेताओं की हत्या से बसपा कार्यकर्ताओं में नाराज़गी है। हालांकि पुलिस इसे साजिश नहीं मानती बल्कि आपराधिक घटनाओं का हिस्सा मानकर चल रही है।

दस अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर सदर से दो बार विधायक रहे हाजी अलीम का शव उनके कमरे में मिला। इस संदिग्ध मौत का पुलिस अभी सुराग तलाश रही है। हाजी अलीम के शव में गोलियां मिलने से ह्त्या किये जाने की पूरी आशंका नज़र आ रही है।

हाजी अलीम के परिजनों ने भी हत्या होने का शक जताया है। पहले अफवाह उडी थी कि हाजी अलीम की हत्या नहीं बल्कि ये सूइसाइड का केस है। लेकिन जिन संदिग्ध परिस्थितियों में शव बरामद हुआ वह हाजी अलीम की हत्या किये जाने की तरफ इशारा करता है।

अभी हाजी अलीम की मौत का मामला सुलझा भी नहीं था कि 13 अक्टूबर को गाजीपुर जमानिया क्षेत्र में मदनपुरा गांव में बसपा नेता श्रीप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना को गोली मारकर हत्या किये जाने का मामला सामने आया। श्रीप्रकाश सिंह का शव नहर किनारे पड़ा मिला। उनकी पीठ पर गोलियों के निशान मिले हैं।

श्रीप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा से नाता तोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था और इलाके में उनकी अच्छी धाक थी। वे स्थानीय बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेताओं में से एक थे।

बसपा नेताओं की हत्या का सिलसिला यहीं नहीं थमा कि 15 अक्टूबर को अंबेडकरनगर जिले के हंसवार थाना क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता ज़ुर्गाम मेहंदी और उनके कार चालक की गोली मारकर हत्या कर दी गयी।

ज़ुर्गाम मेहंदी नसीराबाद के रहने वाले थे और टांडा और उसके आसपास के इलाको में उनका अच्छा प्रभाव था। उनके हत्या उस समय हुई जब वे अपनी कार से टांडा जा रहे थे। जानकारी के मुताबिक ज़ुर्गाम मेहंदी की कार पर करीब आधा दर्जन बाइक सवारों ने घेर कर गोलियां चालयी।

फिलहाल अहम सवाल यह है कि एक सप्ताह के अंदर बहुजन समाज पार्टी के तीन कद्दावर नेताओं की हत्या के पीछे क्या रहस्य है। क्या तीनो हत्याएं राजनैतिक रंजिश का हिस्सा है या ये आपराधिक घटनाएं हैं।

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