यशवंत सिन्हा ने बजट को बताया ‘वोट पाने के लिए पैसे बांटने जैसा’

नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा अपने कार्यकाल के आखिरी बजट पेश किये जाने के बाद पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे वोट पाने के लिए पैसे बांटने जैसा करार दिया है।

एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा कि चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार को अंतरिम बजट लाना चाहिए था लेकिन सरकार ने संविधान की टाक पर रखते हुए अपना छटा बजट पेश कर दिया।

सिन्हा ने कहा कि लोग सिर्फ बजट के अच्छे या बुरे होने की बातें कर रहे हैं लेकिन किसी का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा कि सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करके छटवां बजट पेश कर दिया।

यशवंत सिन्हा ने कहा कि इस सरकार का एक ही मूल मंत्र है कि कैश देकर वोट ले लो। उन्होंने याद दिलाया कि अप्रेल- मई में लोकसभा चुनाव होने हैं, किसानो के लिए लाया गया एक्सपेंडिचर दिसंबर से लागू किया जा रहा है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि किसी चीज़ को पुरानी तारीखों से लागू किया जाए।

उन्होंने कहा कि दिसंबर से लागू करने का मतलब है कि यदि अप्रेल मई में आम चुनाव होते हैं तो इससे पहले मार्च में सरकार किसानो के खाते में दो हज़ार रुपये भेजेगी। ये सीधा सीधा कैश फॉर वोट का मामला है।

यशवंत सिन्हा ने कहा कि इस सरकार ने पिछले 70 वर्षो की परम्पराओं को किनारे लगा दिया है। लोकसभा में वित्त मंत्री अंतरिम बजट पेश करने के लिए खड़े होते हैं लेकिन वे अंतरिम बजट नहीं बल्कि सरकार का छठा बजट पेश कर देते हैं।

सिन्हा ने आरोप लगाया कि यह सरकार इनकम और खर्च को बढ़ा कर बताने का प्रयास कर रही है। सारी दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कई ऐसी बातें हैं जिनसे साफ़ होता है कि सरकार हड़बड़ी में है और उसे लगता है कि इन बातो पर किसी का ध्यान नहीं जायेगा लेकिन क्या ये बजट स्टेंडिंग कमेटी में जायेगा ? क्या इसके लिए किसी के पास समय है कि वह इस बजट में छिपी चीज़ो को ढूंढकर उठाये और इसे स्टेंडिंग कमेटी में भेजने की मांग करे ?

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार ने आज पेश किये अपने बजट में कई लोकलुभावन एलान किये हैं। जहाँ एक तरफ आयकर की सीमा को पांच लाख कर दिया गया है वहीँ किसानो की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के नाम पर उन्हें प्रतिमाह पांच सौ रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराये जाने का एलान किया है। यह आर्थिक सहायता दो दो हज़ार की तीन किश्तों में उन किसानो के खाते में पहुंचेगी जिनके पास दो हेक्टेयर या उससे कम ज़मींन हैं।

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