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मोदी सरकार की नई टेंशन: खुदरा महंगाई दर में बढ़ोत्तरी

नई दिल्ली। देश के अर्थव्यवस्था को लेकर जहाँ विपक्ष मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है अब वहीँ खुदरा(रिटेल) महंगाई दर में बढ़ोत्तरी ने मोदी सरकार को एक और टेंशन दे दिया है।

अक्टूबर महीने में सीपीआई दर बढ़कर 3.58 फीसदी हो गई है जोकि बीते 7 महीने का उच्चतम स्तर है। इससे पहले सितंबर में उपभोक्ता कीमत सूचकांक (सीपीआई) 3.28 फीसदी दर्ज की गई थी। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में कोर महंगाई दर 4.6 फीसदी से घटकर 4.5 फीसदी रही है। जबकि शहरी इलाकों की खुदरा महंगाई दर 3.44 फीसदी से बढ़कर 3.81 फीसदी रही।

महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में ग्रामीण इलाकों की रिटेल महंगाई दर 3.15 फीसदी से बढ़कर 3.36 फीसदी रही है। महीने दर महीने आधार पर खाद्य वस्तुओं रिटेल महंगाई दर 1.25 फीसदी से घटकर 1.9 फीसदी रही।

महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में ईंधन और बिजली की रिटेल महंगाई दर 3.92 फीसदी से बढ़कर 6.36 फीसदी रही है। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में खाने-पीने की चीजों की रिटेल महंगाई दर 1.25 फीसदी से घटकर 1.9 फीसदी रही है। महीने दर महीने आधार पर अक्टूबर में ईंधन और बिजली की रिटेल महंगाई दर 3.92 फीसदी से बढ़कर 6.36 फीसदी रही है।

सब्जी खंड में महंगाई दर दोगुनी होकर 7.47 प्रतिशत हो गई, जो सितंबर में 3.92 प्रतिशत थी. अंडा और दूध तथा दूध से बने उत्पादों की महंगाई दर भी ऊंची रही। हालांकि तिमाही आधार पर अक्टूबर में फलों की कीमतों में कमी आई।

दलहन की महंगाई दर में गिरावट जारी रही और इसमें आलोच्य महीने में 23.13 प्रतिशत की गिरावट आई। सितंबर में इसमें 22.51 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वहीं तिमाही आधार पर ईंधन और बिजली महंगी हुई। आवास खंड में भी उच्च महंगाई दर दर्ज की गई।

इस बढ़ोतरी के बाद दिसंबर में रिज़र्व बैंक की आने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। इससे पहले अक्टूबर में आरबीआई ने मौद्रिक नीति समीक्षा में मंहगाई दर में तेज़ी के चलते ब्याज दर में (रेपो रेट) कोई बदलाव न कर इसे 6 फीसदी पर बरकरार रखा था।

 

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