मॉब लिचिंग पर कठोर कानून के पक्ष में सुप्रीमकोर्ट, जारी की गाइडलाइन

नई दिल्ली। भीड़ द्वारा पीट पीट कर निर्दोष लोगों की जान लेने के मामले में (मॉब लिचिंग) सुप्रीमकोर्ट ने आज कहा कि कोई भी स्वयं में कानून नहीं हो सकता। कोर्ट ने अपनी अहम टिप्पणी में कहा कि देश में भीड़तन्त्र की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुप्रीमकोर्ट ने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाये जाने की सलाह देते हुए कहा कि भीड़तंत्र की भयानक गतिविधियों को नये कायदे नहीं बनने दिया जा सकता और इन पर सख्ती से रोक लगाने की जरूरत है। कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता। कोर्ट ने कहा कि संसद में मॉब लिकिंग के खिलाफ कठोर कानून बने।

सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि कानून का शासन कायम रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है इसलिए यह जरूरी है कि सरकार मॉब लिंचिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाये।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बहुत बढ़ गयी हैं और कई लोगों की जान भी भीड़ ने ले ली है। देश में मॉब लिंचिंग की घटना उस समय सुर्ख़ियों में आयी जब उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अख़लाक़ को गौ मांस के शक में भीड़ ने पीट पीट कर मार दिया।

इतना ही नहीं इस वर्ष झारखंड के रामगढ़ में पिछले साल मॉब लिंचिंग के मामले में अलीमुद्दीन नाम के एक शख्स की हत्या कर दी गयी थी, वहीं हाल ही में महाराष्ट्र के धुले में बच्चा चोरी के आरोप में पांच लोगों की और उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गौकशी के शक में एक व्यक्ति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि 4 हफ्तों में केंद्र और राज्य सरकार अदालत के आदेश को लागू करें। इतना ही नहीं, मामले में फैसले से पहले टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सिर्फ कानून व्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि गोरक्षा के नाम पर भीड़ की हिंसा क्राइम है। अदालत इस बात को स्वीकार नहीं कर सकती कि कोई भी कानून को अपने हाथ में ले।

सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइंस:

1. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

2. कानून का शासन कायम रहे यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

3. कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता है।

4. मॉब लिचिंग के खिलाफ संसद कठोर कानून बनाये।

5. संसद इस मामले में कानून बनाए और सरकारों को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए।

6. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भीड़तंत्र के पीड़ितों को सरकार मुआवजा दे।

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