मॉब लिचिंग, एनआरसी और रोज़गार पर पीएम मोदी ने तोड़ी चुप्पी, पढ़िए- पूरा इंटरव्यू

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ‘मैं एक विनम्र कामदार हूँ।’ उन्होंने मॉब लिचिंग, रोज़गार और एनआरसी के मुद्दे पर अपनी ख़ामोशी तोड़ते हुए अपनी राय रखी।

प्रधानमंत्री मोदी ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को अपराध करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं (मॉब लिंचिंग) को महज आंकड़ों तक सीमित रख कर राजनीति करना एक मजाक होगा। एक होकर इस तरह की घटनाओं का विरोध करने के बजाय अपराध और हिंसा जैसी घटनाओं का राजनीतिक फायदा उठाना एक विकृत मानसिकता का परिचायक है।

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने और उनकी पार्टी (भाजपा) ने कई मौकों पर स्पष्ट शब्दों में ऐसी घटनाओं और ऐसी मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। इस तरह की एक भी घटना दुर्भाग्पूर्ण है। हर किसी को समाज में शांति और एकता सुनिश्चित करने के लिए राजनीति से ऊपर उठना चाहिए।

विकास नहीं विरासत का है महागठबंधन:

पीएम मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा कि विपक्ष का महागठबंधन विकास का नहीं, बल्कि विरासत का महागठबंधन हैं। अब देखना यह है कि यह महागठबंधन चुनाव के पहले टूटता है या फिर चुनाव के बाद।

इस दरम्यान पीएम मोदी ने एनडीए के सहयोगी दलों के नाखुश होने की खबरों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि एनडीए के सहयोगी दल एकजुट हैं। अविश्वास प्रस्ताव और राज्यसभा उपसभापति चुनाव में जीत इसका सबूत हैं। उन्होंने कहा कि हमको एनडीए से बाहर के दलों का भी समर्थन मिला हुआ है।

राहुल के गले मिलने की घटना  बचकानी हरकत :

पीएम मोदी ने राहुल के गले मिलने वाली घटना का जिक्र किया है और इसे बच्चों वाली हरकत बताया है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राहुल गांधी के गले लगने वाली घटना पर पीएम मोदी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि यह आपको तय करना है कि यह एक बचकानी हरकत थी या नहीं और अगर आप निर्णय लेने में असमर्थ हैं, तो आप उनकी विंक यानी आंख मारने वाली हरकत देखें और आपको जवाब मिल जाएगा।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि मैं एक विनम्र कामदार हूं। मैं इस देश के नामदारों की तुलना में कुछ भी नहीं हूं, जिनके पास खुद की अपनी अनूठी शैली है। वे तय करते हैं कि किससे नफरत करनी है, कब करनी है और किससे प्यार करना है और इसका कैसे दिखावा करना है। इन सब में, मेरे जैसा कामदार क्या कह सकता हैं?

पिछले एक साल में एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां पैदा हुईं:

रोजगार के मुद्दे पर लगातार विपक्ष की आलोचनाओं का सामना कर रहे पीएम ने इस मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में ही एक करोड़ से ज्या दा रोजगार दिए गए, इसलिए ऐसा प्रचार करना कि रोजगार पैदा नहीं हो रहे, निश्चित रूप से बंद होना चाहिए।

एनआरसी पर तोड़ी ख़ामोशी:

जिनका खुद से भरोसा उठ चुका है, जिन्हें जनसमर्थन खोने का डर है और जिनकी हमारे संस्थानों में कोई आस्था नहीं, वही लोग गृहयुद्ध, खून-खराबा और देश के टुकड़े-टुकड़े जैसे शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे लोग नि:संदेह देश की नब्ज से कटे हुए हैं। मैं आश्वस्त करता हूं कि भारत के किसी भी नागरिक को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। एनआरसी में तय प्रक्रिया के अनुसार सभी को पर्याप्त मौके दिए जाएंगे।

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