मॉब लिंचिंग पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, कहा ‘इसे रोकना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी’

नई दिल्ली। भीड़ द्वारा पीट पीट कर जान लिए जाने की घटनाओं पर सुप्रीमकोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि मॉब लिंचिंग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि भीड़ द्वारा हिंसा को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है। चाहे कोई भी हो, उसे कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। ऐसी घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर है।

गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी और भीड़ द्वारा लोगों को पीट-पीटकर मार दिए जाने की घटनाओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। लेकिन साथ ही कहा है कि कोई कानून को हाथ में नहीं ले सकता, ऐसे मामलों पर रोक लगाना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।

मॉब लिंचिंग और गोरक्षा के नाम पर हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सकता है। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी ने गोरक्षा के नाम पर बढ़ती गुंडागर्दी और हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विस्तृत आदेश की आवश्यकता है। इस आदेश में हिंसा पीडि़तों के मुआवजे और जांच की निगरानी का प्रावधान किया जा सकता है।

बता दें कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डालने की कई घटनाएं सामने आयी हैं। देश के अलग अलग जगहों से कहीं गाय के नाम पर तो कहीं बच्चा चोरी के शक में भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार दिए जाने की कई घटनाओं का खुलासा होता रहा है।अब देखना है कि सुप्रीमकोर्ट की आज की टिप्पणी पर राज्य सरकारें मॉब लिंचिंग रोकने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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