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मुफ्त डेटा में फंसा है नौजवान, सिर्फ गोदी मीडिया की सुर्ख़ियों तक सीमित हैं बंपर भर्ती

ब्यूरो(राजाज़ैद)। हिंदी के कुछ अखबार बड़ी हेडलाइन के साथ लिखते हैं इस विभाग में निकल रहीं बंपर नौकरियां लेकिन वे नौकरियां कहीं दिखाई क्यों नहीं देतीं ? आखिर नौकरियां जा कहाँ रही हैं ? यह सवाल उठना इसलिए भी लाज़मी है क्यों कि बेरोज़गारी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

देश के युवाओं का एक बड़ा समूह फिलहाल अनलिमिटेड कॉल और मुफ्त डेटा में उलझा है। थोड़ा बहुत समय मिलता है तो वह उस व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में अध्यन करता है, जहाँ हर व्यक्ति इतिहास को अपने ढंग से पेश करने में सक्षम है।

फिलहाल सब कुछ ठीक ठाक है। कुछ बेरोज़गार युवाओं को अपने रोज़गार से अधिक कश्मीर से धारा 370 हटने की ख़ुशी और राम मंदिर में फैसला आने की उत्सुकता है। यही कारण है कि वह फेसबुक ट्विटर से समय मिलने के बाद अपनी रातो की नींद हराम करके व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर मिले झूठे और मनगढ़ंत ज्ञान को इधर उधर शेयर कर रहा है।

आखिर मामला राष्ट्रवाद का है। बेरोज़गार युवको को यह ज्ञान भी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से ही मिल रहा है कि 2014 से पहले देश में कभी किसी सरकार ने राष्ट्रवाद की चिंता नहीं की। बात भी सही है तब न देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं होती थीं और न ही राष्ट्रवाद के नाम पर किसी के कपडे फाड़े जाते थे।

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में एक और नया विषय आया है और अधिकतर राष्ट्रवादी बेरोज़गार इस विषय का गहन अध्यन करने में व्यस्त हैं। यह विषय पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलाने का है।

लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा कि सरहद पार सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने तक बेरोज़गार युवाओं को क्या लाभ मिला ? वे तब भी बेरोज़गार थे और अब भी बेरोज़गार हैं। उनकी ज़िंदगी तब भी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के बीच उलझी थी।

जब सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के एलान किया तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर बैठे ज्ञानी लोगों की बड़ी विकृत सोच सामने आयी। कुछ ने कहा अब कश्मीर में दारु के ठेके खोलेने, फार्म हाउस बनाने, तो कुछ ने कश्मीरी लड़कियों से शादी करने की इच्छा जताई। सचमुच ये ज्ञान बेहद बिचलित कर देने वाला है।

फिलहाल सच्चाई यही है कि देश के नौजवानो का एक बड़ा वर्ग मुफ्त डेटा का आनंद ले रहा है और समय काटने के लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप उसमे भरपूर योगदान दे रहे हैं लेकिन देश की यह युवा पीढ़ी जब होश संभालेगी तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चूका होगा।

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