मिलिए, 103 वर्षीय बुजुर्ग भारतीय जांबाज से, जिन्होंने लड़ा था “द्वितीय विश्वयुद्ध”

ब्यूरो (राम मिश्रा): अमेठी:बहादुरी इनके डीएनए में है हम बात कर रहे है 103 वर्षीय भारतीय सैनिक राम गरीब पाल की,राम गरीब पाल उन वीर सैनिकों में शामिल रहे, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में साहस का परिचय दिया।

इनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र से भी दिया गया। इस वीर ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अद्‍भुत वीरता का प्रदर्शन किया, अपने साथी सैनिकों का हौंसला बढ़ाते हुए उनके साथ युद्ध में डटकर मुकाबला किया ।

राम गरीब पाल का जन्म-
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के मुसाफिरखाना विकासखण्ड अन्तर्गत गाँव भागूपुर गुन्नौर में  2 अक्टूबर 1915 को राम गरीब पाल का जन्म हुआ था। राम गरीब के पिता सन्तू किसान थे राम गरीब पाल की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के स्थानीय स्कूल में हुई और वो कुश्ती के बेहतरीन खिलाड़ी भी रहे।

दरअसल क्षेत्र के कई गांव के लोग सेना में अलग अलग पदों पर काम कर रहे थे ये सब देखकर राम गरीब पाल ने सेना में जाने का फैसला किया। 1945 में पायनियर कम्पनी में सिपाही के तौर पर उनकी भर्ती हुई ।

देश सेवा के लिए मिला प्रशस्ति पत्र-
पायनियर कम्पनी में तैनाती के दौरान उनकी बहादुरी की चर्चा का विषय बन गई और वह सेना के अधिकारियों की निगाह में वो आये और 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध भारतीय योद्धा के रूप में उन्होंने अहम भूमिका अदा की और उन्हें देश सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया ।
द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद वह घर वापस चले आये ।

दूसरे विश्वयुद्ध में भारत के पास थी सबसे बड़ी सेना-
दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत 1 सितम्बर 1939 में हुई थी जब जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया इस आक्रमण के बाद फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा कर दी। फ्रांस की घोषणा के बाद इंग्लैंड और अन्य राष्ट्रमंडल देशों ने समर्थन किया, जिससे ये युद्ध विश्वयुद्ध में बदल गया फ्रांस की हार के बावजूद ब्रिटेन व अन्य राष्ट्रमंडल देश धुरी राष्ट्रों से संघर्ष करते रहे।

1941 में यूरोप के धुरी देशों ने सोवियत संघ पर हमला किया दूसरे विश्वयुद्ध के प्रारंभ में करीब दो लाख भारतीय सैनिक शामिल थे। जिनकी संख्या युद्ध खत्म होने पर 25 लाख हो गई थी। जो उस वक्त किसी देश के पास सबसे बड़ी सेना थी युद्ध में 36 हजार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।

सेना में भर्ती होकर आज भी वतन की सेवा में लगा राम गरीब का परिवार-
बता दे कि रामगरीब पाल के दो बेटे,सूबेदार मेजर शिवशंकर और सूबेदार रामकुमार भी सेना में भर्ती होकर अपने पिता की तरह देश सेवा करते हुए रिटायर्ड हुए। वही बड़े बेटे राम अनंद किसान बनकर माँ भारती की सेवा कर रहे है ।

यही नही अपने बाबा और पिता की भांति सूबेदार बाल गोविन्द हवलदार,विजय बहादुर और नायक प्रद्युम्न तीनो पुत्र राम अनंद और अनुरुद्ध कुमार , अजय कुमार दोनों पुत्र शिवशंकर एवं मनोजकुमार पुत्र रामकुमार भी सेना में भर्ती होकर आज भी देश की सेवा कर रहे है ।

आयोजित हुआ सम्मान समारोह-
एसआरपीवी स्कूल भागूपुर में सोमवार को 7वा वार्षिकोत्सव मनाया गया जिसके मुख्य अतिथि राम गरीब पाल मौजूद रहे और स्कूल प्रबंधन ने उनका सम्मान किया।

वहीं इस स्कूल के छोटे छोटे बच्चो ने देर शाम तक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये इस मौके पर स्कूल के सभी शिक्षक और छात्रो के अलावा सैकड़ो की संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद थे स्कूली बच्चो ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से सबका मन मोह लिया।

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