मायावती और आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार करने पर चुनाव आयोग ने लगाई पाबंदी

नई दिल्ली। चुनाव प्रचार के दौरान कटु भाषा का इस्तेमाल करने की शिकायतों को आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव प्रचार करने पर पाबंदी लगा दी है।

यह पाबंदी योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे और मायावती पर 48 घंटे के लिए लगायी गयी है। यह पाबंदी 16 अप्रेल को सुबह 06 बजे से लागू होगी। चुनाव आयोग द्वारा पाबंदी लगाए जाने के बाद योगी आदित्यनाथ और मायावती लोकसभा चुनाव के लिए ना ही कोई रैली को संबोधित कर पाएंगे, ना ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पाएंगे और ना ही किसी को इंटरव्यू दे पाएंगे।

चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद योगी आदित्यनाथ 16, 17 और 18 अप्रैल को कोई प्रचार नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा मायावती 16 और 17 अप्रैल को कोई चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगी।

इससे पहले सोमवार (15 अप्रैल, 2019) को मायावती और योगी आदित्यनाथ पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से नाराजगी जताई और इन दोनों नेताओं पर कार्रवाई न किए जाने को लेकर चुनाव आयोग (ईसी) को तलब किया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने ईसी के प्रतिनिधियों से मंगलवार (16 अप्रैल, 2019) से पहले हाजिर होने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में नेताओं द्वारा अपने चुनावी भाषणों में जाति और धर्म का जिक्र कर घृणा फैलाने वाली टिप्पणियों के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में ऐेसे नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, “यह चुनावी पैनल की जिम्मेदारी है और वह ऐसे मसलों पर आंखों बंद कर के नहीं बैठ सकता है।”

वहीं कोर्ट के सवाल के जवाब में चुनाव आयोग ने बताया था कि उसके पास बेहद सीमित शक्तियां होती हैं और वह सिर्फ नोटिस जारी कर सकता है, सलाह दे सकता और आदर्श आचार संहिता का उलंल्घन करने पर पार्टियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।

ईसी ने कोर्ट के समक्ष कहा था, “हमारे पास इससे अधिक शक्तियां नहीं है। हम लोगों को अयोग्य नहीं घोषित कर सकते हैं।” वहीं, कोर्ट ने इस पर कहा था- आपको इस तरह के बयान आने पर कार्रवाई करनी चाहिए।

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