मानसून से खुलेगी स्मार्ट सिटी के दावों की पोल

नई दिल्ली (राजा ज़ैद)। केरल में मानसून दस्तक दे चूका है और यह आगे बढ़ रहा है। इस बीच मानसून से होने वाली बारिश से कई उन शहरो का ड्रेनेज सिस्टम पता चल जायेगा जिन्हे स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल किया गया है।

जानकारों की माने तो किसी भी शहर का ड्रेनेज सिस्टम उस शहर में हुए विकास कार्यो को नापने का बड़ा पैमाना माना जाता है। यदि कमजोर ड्रेनेज सिस्टम के चलते शहर बारिश के दौरान जल भराव होता है तथा पानी की तुरंत निकासी नहीं होती तो उसे विकसित शहर नहीं कहा जा सकता।

पिछले वर्ष मानसून के दौरान मुंबई में मचे हाहाकार की बुरी यादें लोगों के अब तक दिल और दिमाग पर छायी हुई हैं। देश की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाली मुंबई का ड्रेनेज सिस्टम कई शहरो की तुलना में कमज़ोर माना जाता है।

पिछले कई दशकों में महाराष्ट्र की सरकारें बदलीं, मुंबई महानगर पालिका में भी सत्ता बदली लेकिन मुंबई का ड्रेनेज सिस्टम जस का तस रहा। यानि थोड़ी सी बारिश में ही कुछ ख़ास इलाको की सड़को पानी भरना एक सामान्य सी बात होकर रह गयी है।

इतना ही नहीं पिछले वर्ष मानसूनी बारिश के दौरान गुजरात के वड़ोदरा सहित कई उन शहरो में जलभराव की स्थति पैदा हो गयी थी जिन्हे सरकार ने स्मार्ट सिटी की लिस्ट में शामिल किया था।

वर्ष 2014 में सत्ता में आयी मोदी सरकार ने कई शहरो को स्मार्ट सिटी बनाने का एलान किया। शहरो को स्मार्ट बनाने में कितनी प्रगति हुई ये इस मानसून में साफ़ हो जाएगा। यदि स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल शहरों में जलभराव होता है तो साफ़ समझिये कि उस शहर को स्मार्ट बनाने की दिशा में बुनियादी काम ही नहीं हुआ।

जानकारों की राय में शहरो के ड्रेंनेज सिस्टम में सुधार के बिना स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह सफल नहीं माना जा सकता। यदि सड़को पर बारिश का पानी जमा है तो स्वच्छता के कोई मायने नहीं रह जाते।

ऐसे में मानसून की दस्तक के साथ एक बार फिर सरकार के स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत अभियान का इम्तेहान होना है। देखना होगा कि स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल शहरो में जल भराव और ड्रेनेज सिस्टम की स्थति इस बार क्या रहती है।

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