महाराष्ट्र सरकार से हक मांगने मुंबई पहुंचे 40 हज़ार किसान

मुंबई। पूर्ण कर्जमाफी की मांग को लेकर भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में करीब 40 हज़ार किसानो ने मंबई के आज़ाद मैदान में डेरा डाल लिया है। महाराष्ट्र के नासिक से करीब 200 किलोमीटर तक पैदल चलकर मुंबई पहुंचे किसान आज विधानसभा का घेराव करेंगे।

वहीँ महाराष्ट्र सरकार के सूत्रों के अनुसार किसानों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेगा। ये मुलाकात दोपहर 2 बजे होगी, जिसके बाद किसान अगले कदम पर फैसला लेंगे।

किसानों के इस प्रदर्शन को कई राजनीतिक दलों ने भी अपना समर्थन दिया है। रविवार को शिवसेना और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने किसानों के साथ खड़े होने की घोषणा की। इधर कांग्रेस ने पहले ही इस मोर्चे को अपना समर्थन दे दिया है।

इधर राज्य सरकार ने किसानों की मांगों की जांच के लिए एक छह सदस्यीय समिति नियुक्त करने का निर्णय लिया है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर हुई एक उच्च स्तरीय मीटिंग के दौरान निर्णय लिया गया।

समिति में महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल, कृषि मंत्री पांडुरंग निधिकर, सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन, जनजातीय विकास मंत्री विष्णु सावरा, राज्य सहकारी समिति सुभाष देशमुख और शिवसेना के नेता और पीडब्ल्यूडी मंत्री एकनाथ शिंदे शामिल होंगे। महाराष्ट्र सरकार ने सभी मशीनरी को भी प्रदर्शनकारियों के प्रति सकारात्मक और सहानुभूति रखने का निर्देश दिया है।

रविवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने किसानों से मुलाकात के दौरान उन्हें कर्ज से मुक्ति दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा, ”हम कर्ज माफी नहीं चाहते। माफी किसी मामले के दोषी को दी जाती है। हम दोषी नहीं हैं। हम कर्ज से मुक्ति चाहते हैं।”

वहीं मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर भी हमला बोला। ठाकरे ने इस दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की कर्जमाफी के शाह के वादे का क्या हुआ।

महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी किसानों का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने ट्वीट कर कहा, ”सरकार के खिलाफ किसानों के इस संघर्ष में कांग्रेस पार्टी उनके साथ है। मुख्यमंत्री को किसानों से बात करनी चाहिए और उनकी मांगों को स्वीकार करना चाहिए।”

क्या है किसानों की मांगें?

किसानों किसानों ने पूरे कर्ज और बिजली बिल माफी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग रखी है। किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों से किए गए वादों को पूरा न करके उनके साथ धोखा किया है।

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