महाराष्ट्र में प्रतिदिन 7 किसान करते हैं आत्महत्या, सीएम फडणवीस के गृह क्षेत्र में हुई इतनी मौतें

हाल ही में मोदी सरकार ने एमएसपी बढ़ाने का एलान किया है लेकिन एमएसपी का फायदा किसानो को तभी मिल पायेगा जब उसके खेत में फसल उगेगी। प्राकर्तिक आपदाओं ओले पड़ने, सूखा पड़ने, सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था न हो पाने पर फसल सूख जाने की स्थति में किसान की मेहनत बेकार चली जाती है।

मुंबई ब्यूरो। महाराष्ट्र में किसानो द्वारा आत्म हत्या किये जाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। क़र्ज़ और बेहाल फसलों से लगातार हो रहे घाटे के चलते महाराष्ट्र के किसान ख़ुदकुशी करने को मजबूर हैं। किसानो की आत्महत्या की घटनाओं के आगे किसान कल्याण के लिए सरकारी दावे झूठे साबित हो रहे हैं।

महाराष्ट्र में इस साल जून तक 1307 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। यानि प्रतिदिन 7 किसानो द्वारा आत्म हत्या की जा रही है। पिछले जनवरी से जून 2018 के बीच 1398 किसानो द्वारा आत्म हत्या की घटनाएं सामने आयी थीं। इस साल आंकड़े भले ही पिछली साल से कम हैं लेकिन बड़ी सच्चाई यह भी है कि किसानो द्वारा आत्महत्या की घटनाएं अभी थमी नहीं है।

इस साल जहां किसानों की मौत के 477 केस दर्ज हुए हैं। वहीं पिछले साल ये आंकड़ा 454 था। इस साल सीएम देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र विदर्भ में किसानों की सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। इस साल जून के अंत तक 598 केस दर्ज हुए हैं, जो पिछले साल से 58 कम हैं।

ऋण माफी योजना के तहत अब तक 77.3 लाख खातों में से 38 लाख किसानों को भुगतान हुआ है। हालांकि किसानों को भुगतान की रफ्तार काफी धीमी है। इसी वजह से फसलों के लिए जो सरकार लोन देती है, उसका पर भी इसका असर पड़ा है।

पिछले साल के मुकाबले इस बार फसलों के लिए चालीस फीसद कम लोन दिया गया है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि पुराने भुगतान से पहले बैंकों ने नया कर्ज देने से इंकार कर दिया है। इस साल अप्रैल-मई में सरकार ने फसलों के लिए किसानों को 1426 करोड़ का लोन दिया है।

इस मामले पर सीएम फडणवीस ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल को चिठ्ठी लिखकर प्रक्रिया को तेज करने की भी गुजारिश की थी। फसलों की कीमत भी इस प्रक्रिया के धीमे पड़ने के पीछे की एक वजह है। केंद्र सरकार ने अभी 14 फसलों की एमएसपी में इजाफा किया है। मगर खरीदी और भंडारण के काम में अड़चनें आ रही हैं। ऐसे में किसानों को फसलों की बिक्री का बकाया पैसा मिलने में अभी कुछ और वक्त लग सकता है।

ऐसे हालातो में बीज और खाद के लिए लिया गया पैसा किसान पर बोज बन जाता है और समय से पैसा न चुका पाने के कारण किसान पर व्याज का दबाव बढ़ता चला जाता है। इसलिए बढे हुए एमएसपी का फायदा किसान को तभी मिलेगा जब उसके खेत में अच्छी फसल हो।

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