महागठबंधन के लिए कांग्रेस ने मानी विपक्षी दलों की ये शर्त

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के संयुक्त गठजोड़ ‘महागठबंधन’ बनाने के प्रयास तेज हो गए हैं। सूत्रों की माने तो अब कांग्रेस इस बात पर सहमत हो गयी है कि प्रधानमंत्री पद पर फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही किया जाए।

इससे पहले ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मायावती और तेजस्वी यादव ने कई बार मीडिया के समक्ष घुमाफिरा कर यह कहा था कि पीएम पद के लिए उम्मीदवार चुनाव बाद ही किया जाना चाहिए।

कोलकाता में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी मीडिया के समक्ष कहा था कि मीडिया पूछे कि पीएम पद का चेहरा कौन होगा ? ऐसा सवाल करके मीडिया विपक्ष में फूट डालने की कोशिश न करे।

वहीँ सूत्रों की माने तो कांग्रेस जल्द ही उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर निर्णय लेने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बीजेपी विरोधी दलों से गठबंधन करेगी। इस गठबंधन में कांग्रेस, बसपा और सपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल को भी शामिल किया जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे के लिए भी कांग्रेस ने फॉर्मूला तय कर लिया है। जल्द ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद इस फॉर्मूले के साथ बसपा और सपा नेताओं से मुलाकात करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक अब कांग्रेस इस बात को समझ चुकी है कि लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर बीजेपी को सत्ता से बाहर धकेलना मुमकिन नहीं होगा। सेकुलर मतों के विभाजन का पूरा लाभ बीजेपी को मिलेगा, इसलिए कांग्रेस किसी भी कीमत पर सेकुलर मतों का विभाजन रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने का मन बना चुकी है।

लोकसभा चुनाव में बीजेपी की कमर तोड़ने के लिए कांग्रेस की नज़र उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र की 120 सीटों पर लगी है जो बीजेपी ने 2014 में इन तीन राज्यों से जीतीं थीं।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस रणनीति पर काम कर रही है कि विपक्ष को एकजुट कर इन तीन राज्यों में बीजेपी की सीटें आधी से भी कम की जाएँ। वहीँ पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को रोका जाए। जिससे बीजेपी 150 सीटों के अंदर सिमट सके।

फिलहाल देखना है कि महागठबंधन बनने की प्रक्रिया में कितना समय और लगता है। सही मामलो में विपक्ष के बीच सीटों के बंटवारे पर सहमति के बाद ही महागठबंधन की तस्वीर साफ़ हो पाएगी।

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