मध्य प्रदेश में सवर्णों-ओबीसी को मनाने में पसीना बहा रही बीजेपी

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं के बीजेपी विरोधी रुख से बीजेपी में बेचैनी देखी जा रही है। राज्य में एक बार फिर बीजेपी की सत्ता बनाने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का मंत्र धरातल की हकीकत से मेल नहीं खा रहा। फिलहाल ये कहा जा सकता है कि बीजेपी कभी जो जिस जाल में कांग्रेस को फंसाती थी इस बार वह स्वयं उसी जाल में फंस गयी है।

एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के बाद बीजेपी के खिलाफ भड़के मध्य प्रदेश के सवर्णो का रुख पहले से साफ़ हो रहा है। चुनाव में बीजेपी को सवर्णो के वोट जाने से रोकने के लिए सवर्णो की एक नई पार्टी भी तैयार हो गयी है। राज्य में सवर्ण जातियों में साफतौर पर एलान किया जा रहा है कि जो लोग सवर्ण समाज पार्टी को वोट न दे सकते हों वे नोटा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

वहीँ मौके की तलाश में पहले से बैठी कांग्रेस सवर्णो और ओबीसी मतदाताओं की बीजेपी से नाराज़गी को अपने लिए शुभ संकेत मानकर चल रही है। प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई शहरो में सर्वण संगठनों ने बीजेपी विरोधी पोस्टर भी लगाए हैं। जो सर्वण जातियों की बीजेपी से नाराज़गी को उजागर कर रहे हैं।

वहीँ दूसरी तरफ इस बार राज्य के ओबीसी मतदाताओं का रुझान भी बदला बदला सा है। पिछले दिनों ओबीसी जातियों से जुड़े कुछ संगठन भी खुलकर बीजेपी के खिलाफ खड़े दिखाई दिए।

हालाँकि ओबीसी मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए बीजेपी ने न केवल सम्मेलनों के आयोजन किये बल्कि ओबीसी नेताओं को भी आगे रखने की कोशिश की। इसके बावजूद बीजेपी के परंपरागत ओबीसी मतदाता उससे छिटक रहे हैं।

जहाँ तक सवर्ण जातियों से जुड़े मतदाताओं को मनाने का प्रश्न है तो बीजेपी इसके लिए पसीना बहा रही है लेकिन सफलता से दूर है। सवर्ण जातियों के मतदाताओं की नाराज़गी दिल्ली तक पहुँच चुकी है। यही कारण है कि पिछले दिनों अपने मध्य प्रदेश दौरे के दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दृष्टि पत्र समिति के संयोजक विक्रम वर्मा से पूछा कि मैनिफेस्टो में सवर्णों के लिए क्या है?

इस पर बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने मीडिया में कहा कि अध्यक्ष जी को पूछने का पूरा अधिकार है। उनके गाइडलाइंस के अनुसार सवर्णों के लिए हम काम करके दिखाएंगे हमारे दृष्टिपत्र में योजनाओं प्रतिलिक्षित होंगी, लेकिन एक बात बहुत स्पष्ट है कि हम सबका साथ सबका विकास पर काम करते आए हैं।

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