मध्य प्रदेश: चुनाव आयोग ने मानी अधिकारियों की लापरवाही, नायब तहसीलदार सस्पेंड

भोपाल ब्यूरो। मतदान के 48 घंटे बाद ईवीएम सामने आने और स्ट्रॉंग रूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद होने के मामले में कांग्रेस की कोशिशें रंग लायी हैं।

चुनाव आयोग ने कांग्रेस से आरोपों को नोट किया है हालांकि आयोग का कहना है कि ईवीएम मशीनों के साथ किसी तरह की कोई छेड़ छाड़ नहीं की गई है। वहीँ लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार नायाब तहसीलदार राजेश मिश्रा को सस्पेंड कर दिया गया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि 28 नवंबर को मतदान खत्म होने के तुरंत बाद ईवीएम मशीनों को सागर ले जाना चाहिए था लेकिन अधिकारियों की वजह से इसमें दो दिन की देरी हुई जिसके बाद ये विवाद खड़ा हो गया है।

भोपाल कलेक्टर की तरफ से आई रिपोर्ट से ये पता चलता है कि ईवीएम स्ट्रॉंगरुम में लगाए गए सीसीटीवी कैमरा और एलईडी दोनों खराब हो गया था और करीब एक घंटे के लिए लिए काम करना बंद कर दिया था।

घटना मतदान के दो दिन बाद यानि कि 30 नवंबर की सुबह 8.19 से लेकर 9.35 तक का है। इसका कारण बिजली नहीं होना बताया गया है। इसके कारण उस पर्टिकुलर समय अवधि के दौरान अंदर की कैमरे की रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश में पोलिंग खत्म होने के 48 घंटे बाद एक बिना नंबर प्लेट वाली स्कूल बस से ईवीएम लेकर सागर के कलक्टर ऑफिस पहुंची थी।

पार्टी ने कहा है कि यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि एक पार्टी और कुछ लोग हाल में हुए चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। कांग्रेस ने इस मामले की जांच की मांग की है, साथ ही बस में आई ईवीएम को बाकी ईवीएम से अलग करने को कहा है।

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के बावजूद सीएम और जिले के कलेक्टरों के बीच गैरकानूनी बैठकें हुई हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में डीएम काउंटिंग रूम के भीतर मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि स्ट्रॉन्गरूम के पास मौजूद गैरअधिकृत लोगों को भी हटाया जाए।

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