मध्य प्रदेश: इन 24 सीटों पर 25 साल से लगातार हार रही कांग्रेस, इस बार बनाया ये प्लान

भोपाल। मध्य प्रदेश में इस वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनावो को लेकर जहाँ कांग्रेस और सत्तारूढ़ बीजेपी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं वहीँ एक एक सीट पर गुणा भाग लगा रही कांग्रेस के लिए राज्य के 17 जिलों की 24 सीटें मुसीबत बनी हुई हैं।

इन 24 सीटों पर पार्टी को लगातार 25 साल से हार का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी सूत्रों की माने तो इस बार इन सभी 24 सीटों पर नए चेहरे देने की तैयारियां चल रही हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार इन 24 सीटों जातीय समीकरण बीजेपी के फेवर वाले हैं। ऐसे में कांग्रेस अपनी सेंधमारी करने में हर बार फेल रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बार पार्टी ने तय किया है कि इन सभी सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इतना ही नहीं बीजेपी को जड़ से हिलाने के लिए इन सभी सीटों पर नए चेहरे देने के अलावा क्षेत्रीय जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार जिन 24 सीटों पर पार्टी लगातार 1993 से हार रही है, उन सीटों को सूचीवद्ध करके वहीँ की एक एक बूथ का आंकलन किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन सीटों पर मतदाता सूचियों का भी निरीक्षण किया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि यदि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में विजय हासिल करनी है तो उसे बीजेपी के इस 24 सीटों वाले चक्रव्यूह को तोडना होगा। सूत्रों ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ स्वयं इन 24 सीटों को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मंथन कर चुके हैं।

ये हैं वो 24 सीटें जहाँ 25 साल से नहीं जीती कांग्रेस:

मुरैना जिले की अंबाह, भिंड की मेहगांव, शिवपुरी की पोहरी व शिवपुरी, अशोक नगर की अशोक नगर, सागर की रेहली व सागर, छतरपुर की महाराजपुर, दमोह की दमोह, सतना की रैगांव व रामपुर बघेलान, रीवा की त्योंथर व देवतालाब, जबलपुर की जबलपुर कैंट, सिवनी की बरघाट व सिवनी, होशंगाबाद की सोहागपुर-इटारसी, विदिशा की विदिशा, भोपाल की गोविंदपुरा, सीहोर की आष्टा व सीहोर, खंडवा की हरसूद व खंडवा, इंदौर की इंदौर- 2 व इंदौर- 4 विधानसभा क्षेत्र

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