मक्का मस्जिद ब्लास्ट में असीमानंद को बरी करने वाले जज का इस्तीफा

नई दिल्ली। हैदराबाद की मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में आरोपी असीमानंद सहित पांच अन्य आरोपियों को मामले से बरी करने वाले जज रवींद्र रेड्डी ने इस्‍तीफा दे दिया है।

18 मई, 2007 को प्रतिष्ठित चारमीनार के पास स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान शक्तिशाली विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हो गए थे।

विस्फोट के बाद मस्जिद के बाहर भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी से पांच अन्य लोग भी मारे गए थे।इस घटना के 11 साल बाद अदालत ने पाया है कि इन अभियुक्तों के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ है।

अदालत ने असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत मोहनलाल रातेश्वर और राजेंद्र चौधरी को बरी कर दिया है। इन पर एनआईए ने शक्तिशाली विस्फोट करने का आरोप लगाया था।

इस मामले की प्रांरभिक जांच पुलिस ने शुरू की थी, जिसने हरकतुल जिहाद इस्लामी संगठन को दोषी ठहराया था। इस मामले में लगभग 100 मुस्लिम युवक पुलिस के लपेटे में आए थे। इन्हें वर्ष 2008 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में सभी को बरी कर दिया गया था।

मक्का ब्लास्ट मामले में आठ आरोपी थे, जिनमें से एक आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की जांच के दौरान हत्या हो गई थी। दो अन्य आरोपी संदीप वी. दांगे और रामचंद्र कालसंगरा अभी भी फरार हैं।

यह फैसला एनआईए द्वारा दायर आरोपपत्र के संबंध में आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और एनआईए द्वारा कुल तीन आरोपपत्र दायर किए गए थे, जिनमें समय के साथ कई मोड़ आते रहे।

वर्ष 2010 में सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि मस्जिद में विस्फोट हिंदू दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत का कारनामा था। कांग्रेस ने इसे ‘भगवा आतंकवाद’ नाम दिया, तो भाजपा तिलमिला उठी थी। इसके बाद 4 अप्रैल, 2011 को यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया था।

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