मंदिर मुद्दे पर बोलीं उमा भारती ‘मोदी-योगी के रहते नहीं बना मंदिर तो……’

भोपाल ब्यूरो(ऐजाज़ हुसैन राईन)। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि यदि देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के रहते अयोध्या में राममंदिर के निर्माण का रास्ता साफ़ नहीं हुआ, तो देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं को धक्का लगेगा।

रविवार को उमा भारती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह सच्चाई है कि भाजपा की वर्ष 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में दो सीटें थीं। जब राममंदिर आंदोलन हुआ, तो वर्ष 1989 में दो सीटों से 84 सीटें हुई थीं और अंत में 2014 के लोकसभा चुनाव में 284 सीटें आ गयी थीं। उन्होंने कहा, राममंदिर की बहुत बड़ी भूमिका रही है इसलिए मोदी और योगी के रहते हुए जिस तरह लोगों की आशा है, राममंदिर के निर्माण का रास्ता निकलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैं आज भी यही कहूंगी चाहे एक्ट हो, चाहे अध्यादेश हो, सामंजस्य का रास्ता बनाकर ही राममंदिर निर्माण का रास्ता निकालना चाहिए और इसमें सबको सहयोग करना चाहिए।

उमा भारती ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए सबसे पहले यह पहल अटलजी के समय भी हुई थी और चंद्रशेखरजी के समय पर भी हुई थी। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या मोदी का जादू अब भी चलेगा, तो उन्होंने कहा, मोदी का जादू तो चलेगा।

उन्होंने कहा कि अभी हमने त्रिपुरा में विभिन्न नगर निकाय चुनाव जीते हैं। वह अपने आप में बहुत बड़ी कठिन बात थी. वहां हमारी सरकार बनना कठिन बात थी। इसलिए मोदी का जादू अभी चल रहा है।

उमा भारती ने उउदाहरण देते हुए कहा कि 2003 में हम सब विधानसभा में जीते थे, लेकिन वर्ष 2004 में लोकसभा में हार गये थे. ऐसा भी होता है कि जो विधानसभा में होता है वह लोकसभा में न हो. इसका भी शिकार हम ही हुए थे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोगों के विश्वास पर खरी उतरी है। वह अगले साले होनेवाले लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा एक चुनावी सभा में हनुमान जी को दलित बताये जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर उमा भारती ने सफाई देते हुए कहा कि भगवान की तो एक ही जाति होती है कि वह भगवान होते हैं।

उमा भारती ने कहा कि भक्त की भी एक ही जाति होती है कि वह भक्त है। इसके अलावा कुछ नहीं होता। इसके अलावा तो जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि होती है। इसलिए मैं तो यही कहूंगी कि न तो भक्त की कोई जाति होती है और न भगवान की. जैसे सूर्य की जाति नहीं है, हवा की जाति नहीं है, पानी की जाति नहीं है। इसी तरह भगवान और भक्त की भी कोई जाति नहीं होती। वह भक्त होते हैं, वही उनकी जाति होती है और भगवान होते हैं, यही उनकी जाति होती है।

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