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‘मंदिर तुम्हारे परनाना ने नहीं बनवाया’, क्या ये भाषा पीएम पद की गरिमा के अनुरूप है ?

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अभी प्रचार चरम पर नहीं पहुंचा उससे पहले ही भाषाई मर्यादा को दाग लगने शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी द्वारा आज चुनावी सभा में दिए गए भाषण को सुनकर लगता है जैसे स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाषाई मर्यादा को तार तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पीएम मोदी के आज के भाषण को सुनने के बाद एक बड़ा सवाल यह निकला है कि क्या कांग्रेस पर कटाक्ष के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया वह प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की जिसका गुजरात के चुनावो से कोई सरोकार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मोरबी आयी थीं तो उन्होंने नाक पर रुमाल रख लिया था।

सम्भवतः पीएम मोदी अपनी इस टिप्पणी से यह साबित करना चाहते होंगे कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी आम आदमी से मिलने से बचती थीं। लेकिन इस समय न तो इंदिरा गांधी मौजूद हैं और न ही उनका गुजरात चुनाव से कोई ख़ास कनेक्शन है।

स्वयं पीएम मोदी ने कई बार कहा है कि भारतीय जनता पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन स्वयं प्रधानमंत्री अपने कहे से पलट गए और उन्होंने पूर पीएम इंदिरा गांधी को लेकर ऐसी टिप्पणी की जो न सिर्फ अनावश्यक थी बल्कि उसका विकास या गुजरात के चुनाव से कोई सम्बन्ध भी नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दूसरी टिप्पणी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के समोनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाने को लेकर की। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि जो लोग चुनाव में सोमनाथ जा रहे हैं, उनके इसका इतिहास पता नहीं, उनके परनाना ने नहीं बनवाया था ये मंदिर।

क्या सोमनाथ मंदिर में जाने का हक सिर्फ बीजेपी के लोगों को ही है ? एक तरफ पीएम मोदी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने के लिए कहते हैं , वहीँ दूसरी तरफ खुद ही निजी टिप्पणियां भी करते हैं। पीएम मोदी ने आज अपनी रैलियों में जो कुछ कहा उसे सुनकर लगा कि शायद बीजेपी के पास जनता को अपनी उपलधियाँ बताने के नाम पर कुछ नहीं है।

केंद्र में दस वर्ष यूपीए की सरकार रही, डा मनमोहन सिंह दस वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान कई राज्यों के चुनाव भी हुए लेकिन डा मनमोहन सिंह ने गुनावी और गैर चुनावी संभव में हमेशा भाषाई मर्यादा का ध्यान रखा। उनका एक भी भाषण ऐसा नहीं जिस पर विपक्ष को ऊँगली उठाने का मौका मिला हो।

पीएम मोदी की आज की रैलियों के बाद राजनैतिक हलकों में इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। अभी हाल ही में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने अपने एक बयान में कहा था कि मैं पीएम मोदी को याद दिलाना चाहता हूँ कि वे देश के प्रधानमंत्री भी हैं।

(राजा ज़ैद)

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