भोपाल उत्तर सीट: इस बार आरिफ अकील के लिए आसान नहीं चुनावी राह

भोपाल ब्यूरो(राजा ज़ैद)। विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस अपनी सबसे मजबूत कही जाने वाले भोपाल उत्तर की सीट पर नया उम्मीदवार दे सकती है। इस सीट पर 1998 से कांग्रेस लगातार जीतती आ रही है।

भोपाल उत्तर सीट पर 1977 से अब तक 9 बार चुनाव हुआ है इसमें 6 बार कांग्रेस, एक बार निर्दलीय, एक बार जनता पार्टी और एक बार भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार विजयी हुआ है।

इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर आरिफ अकील 1998 से 2013 तक लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं। वहीँ 1990 में इसी सीट से आरिफ अकील ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और वे विजयी हुए थे।

कुल मिलाकर कहा जाए तो भोपाल उत्तर सीट पर आरिफ अकील अपराजेय साबित हुए हैं। इसका बड़ा कारण उनका जनाधार है। हालाँकि लगातार जीत दर्ज करने के बावजूद आरिफ अकील को कांग्रेस ने कोई बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं दी है।

2013 के विधानसभा चुनावो में भी आरिफ अकील ने अपने दम पर 50.70% वोट हासिल किये थे और उन्हें कुल 73070 वोट मिले थे वहीँ इस सीट पर बीजेपी ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था। बीजेपी उम्मीदवार आरिफ बेग को 46.08% वोट मिले थे और वे 66406 वोटो के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे।

यहाँ एक अहम बात यह है कि भोपाल उत्तर विधानसभा का जातीय समीकरण आरिफ अकील के पक्ष में होने के बावजूद उन्होंने किसी भी चुनाव में बड़ी जीत दर्ज नहीं की है।

सिर्फ 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर आरिफ अकील ने 16857 वोटो से जीत दर्ज की। वहीँ 2003 के विधानसभा चुनाव में आरिफ अकील 7708 वोटों से जीते। 2008 में आरिफ अकील की जीत का फैसला और कम हो गया और वे मात्र 4026 वोटों से जीत कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2013 के चुनाव में आरिफ अकील की जीत का मामूली फासला बढ़ा और वे 6664 वोटों से विजयी रहे।

यदि आंकड़ों को सबूत माना जाए तो आरिफ अकील का पूरा दारोमदार उनके परम्परागत मतदाताओं पर ही है। 1998 के बाद से लगातार उनके मतदाताओं में सेंध लग रही है।

वहीँ बीजेपी सूत्रों की माने तो पार्टी हर हाल में भोपाल उत्तर की सीट पर कब्ज़ा करने की कोशिश में जुटी है। 2013 के चुनाव में बीजेपी ने आरिफ बेग उम्मीदवार बनाकर यह साबित कर दिया कि भोपाल उत्तर विधानसभा सीट जीतने के लिए उसे किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाये जाने से परहेज नहीं है।

फिलहाल देखना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी किसे उम्मीदवार बनाती है। पार्टी सूत्रों की माने तो आरिफ बेग को एक बार फिर भोपाल उत्तर से उम्मीदवार बनाया जाना तय है। लेकिन इस बार समीकरण काफी बदल चुके हैं।

इस बार अहिंसा समाज पार्टी जैसी नई पार्टियों के उम्मीदवार की मौजूदगी कांग्रेस और बीजेपी दोनो के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। 2013 के चुनाव परिणाम को यदि आधार मान लिया जाए तो महज एक फीसदी वोट का स्विंग भी दोनों बड़ी पार्टियों के समीकरण बिगाड़ सकता है।

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