बीजेपी सांसद जिन्ना की तस्वीर नहीं बल्कि अलीगढ कितना स्मार्ट सिटी बना ये बताएं : जुनेद क़ाज़ी

न्यूयॉर्क। इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस, यूएसए के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने अलीगढ मुस्लिम विश्वविधालय के छात्रों पर पुलिस द्वारा किये गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। जिन्ना तस्वीर विवाद पर उन्होंने कहा कि छात्रों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि भारतीय मुसलमानो के लिए जिन्ना आस्था का प्रतीक नहीं हैं। इसलिए जिन्ना का नाम लेकर किसी राजनैतिक दल को छात्रों पर अपनी राजनीति चमकाने का हक नहीं है।

उन्होंने कहा कि छात्रों पर राजनीतिक सोच थोपने की जगह उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कदम उठाये जाने चाहिए। जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि जो लोग जिन्ना का नाम लेकर अलीगढ का माहौल सांप्रदायिक रंग में रंगना चाहते हैं उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही होनी चाहिए भले ही वे किसी पार्टी के सांसद, विधायक या मंत्री की क्यों न हों।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि बड़े अफ़सोस की बात है कि जिन्ना की तस्वीर का मुद्दा उठाने वाले सांसद उसी पार्टी से हैं जिनके नेता लाल कृष्ण आडवाणी स्वयं पाकिस्तान यात्रा के दौरान जिन्ना के मज़ार पर जाकर चादर चढ़ाकर आये हैं। उन्होंने बीजेपी सांसद सतीश गौतम से सवाल किया कि क्या उनमे हिम्मत है कि अलीगढ के कुलपति की तरह लाल कृष्ण आडवाणी से सवाल पूछ सकें कि जिन्ना के मज़ार पर जाने के पीछे क्या मज़बूरी थी ?

जुनेद क़ाज़ी ने एएमयू छात्रों और अलीगढ की जनता से शांति, संयम और धैर्य से काम लेने की अपील करते हुए कहा कि हमे किसी हालत में माहौल ख़राब नहीं होने देता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे मुस्लिम यूनिवर्सिटी की भाईचारे और अमन की परम्परा को बरकरार रखते हुए अपने उज्जवल भविष्य की तरफ बढ़ें।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि बेहतर होता कि बीजेपी सांसद जिन्ना की तस्वीर की जगह अलीगढ की जनता को अपने चार साल के कामकाज के बारे में बताते। उन्होंने कहा कि अलीगढ की जनता को हक है कि वह अपने सांसद से पूछे कि चार सालो में अलीगढ के स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में कितनी प्रगति हुई, अलीगढ लोकसभा क्षेत्र में कितने नए स्कूल खुले और कितने बेरोज़गारो को रोज़गार मिला।

उन्होंने कहा कि अलीगढ का इतिहास रहा है कि जब जब सांप्रदायिक ताकतों से सिर उठाया है तब तब उन्हें मूँह की खानी पड़ी है और इस बार भी ऐसा ही होगा। उन्होंने अपील की कि एएमयू छात्र राजनैतिक षड्यंत्र को समझेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से विश्वविद्यालय की गरिमा बनाये रखेंगे।

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