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बीजेपी जानती है किस करवट बैठेगा गुजरात में ऊँट, साख बचाने को ये हो सकता है आखिरी दांव

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। गुजरात चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुकी बीजेपी भी जानती है कि इस बार चुनाव में उसकी राहें आसान नहीं हैं। इसके बावजूद पार्टी नेता बड़े बड़े दावे करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

गुजरात में रूठे पाटीदार पटेलो को मनाने के लिए बीजेपी चिंतन करने में जुटी है। बीजेपी की कोशिश है कि किसी भी तरह चुनाव से पहले आखिरी वक़्त तक पाटीदारो को मना लिया जाए। अगर पूरे पाटीदार न भी माने तो कम से कम आधे से अधिक पाटीदारो का हृदय परिवर्तन कर उन्हें फिर से बीजेपी को वोट देने को राजी कर लिया जाए।

कभी बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक रहे पाटीदारो को मनाने के लिए बीजेपी हर कीमत अदा करने को तैयार दिख रही है। बीजेपी सूत्रों की माने तो अब मंथन इस बात को लेकर चल रहा है कि क्यों न किसी पाटीदार चेहरे को ही मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए।

हालाँकि यह नई बात नहीं है। बीजेपी उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में भी ऐसे एक्सपेरिमेंट कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक जातीय समीकरण को देखते हुए बीजेपी नितिन पटेल को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल को मुख्यमंत्री पद का आदर्श उम्मीदवार माना जा रहा है। बीजेपी सूत्रों की माने तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह मानते हैं कि यदि किसी पाटीदार पटेल को सीएम का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा जाए तो पाटीदारो की मज़बूरी होगी कि वे फिर से बीजेपी को वोट दें।

सूत्रों ने कहा कि फ़िलहाल मुख्यमंत्री विजय रूपानी की अपनी विधानसभा में हालत अच्छी नहीं है। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने हाल ही में राजकोट में बड़ी सभा करके सीएम रूपाणी को यह जता दिया है कि आज भी पाटीदार उनके साथ हैं। ऐसे में बीजेपी उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल पर बड़ा दांव खेल सकती है।

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी नितिन पटेल को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करके पाटीदारो का हृदय परिवर्तन करने की कोशिश करेगी। सूत्रों ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावो में बीजेपी को कांग्रेस से 9 फीसदी वोट अधिक मिले थे। यही उसकी जीत का आधार भी बना लेकिन इस बार कांग्रेस बदली हुई रणनीति से चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर अपने समर्थन में लाकर पिछले चुनाव के 9 फीसदी वोटों के अंतर् को कवर कर लिया है।

चुनाव आयोग के 2012 के गुजरात चुनाव के आकड़ों के अनुसार उस वक्त भाजपा को 47.85 प्रतिशत मत मिले थे वहीं कांग्रेस को 38.93 प्रतिशत मत मिले थे। दोनों पार्टियों के बीच 8.92 प्रतिशत मतों का अंतर था।

सूत्रों ने कहा कि इसलिए बीजेपी की हर चंद कोशिश यही है कि वह किसी तरह पाटीदारो को कांग्रेस से तोड़े और मतों के अंतर् को बरकरार रखे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी किसी भी वक्त नितिन पटेल का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित कर सकती है।

सूत्रों ने कहा कि इस बार चुनाव में बीजेपी के कई दांव उलटे साबित हुए हैं। धार्मिक कार्ड का प्रयोग भी इस बार असफल रहा है। अहमद पटेल से जुड़े एक अस्पताल के कर्मचारी की गुजरात एटीएस द्वारा संदिग्ध आतंकी के तौर पर गिफ्तारी और सोमनाथ मंदिर में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हिन्दू रजिस्टर में साइन करने का मुद्दा भी बीजेपी अधिक समय तक नहीं चला पाई।उससे पहले ही कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को काउंटर कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि भले ही आज भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह 150 सीटें लाने का दावा भर रहे हैं लेकिन वे ये भी जानते हैं कि गुजरात हाथ से गया तो जनवरी 2018 में उनके हाथ से बीजेपी अध्यक्ष का पद जाना भी तय है। उन्हें दोबारा रिपीट होने का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए खासकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष करो या मारो जैसी स्थति है।

गुजरात में अगले सप्ताह पहले चरण का चुनाव होना है। दोनो ही पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है। बीजेपी ने जहाँ 4 मुख्यमंत्रियों,25 केबिनेट मंत्रियों, और 100 से अधिक सांसदों, पूर्व सांसदों और विधायकों की फ़ौज मैदान में उतार रखी है। वहीँ कांग्रेस ने भी अपने सभी बड़े चेहरों को प्रचार में उतारा है।

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