बीजेपी को झटका: लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव के लिए संविधान में संशोधन ज़रूरी !

नई दिल्ली। एक देश एक चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी अपनी कोशिशों में जुटी हैं लेकिन चुनाव आयोग ने साफ़ किया है कि यह बिना संविधान संशोधन के मुमकिन नहीं है।

लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराये जाने को लेकर चुनाव आयोग ने भी अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर वोटिंग के लिए चुनाव आयोग के पास पर्याप्त वीवीपैट मशीनें नहीं है। अगर ऐसी कोशिश होती है, तो इसके लिए नई वीवीपैट मशीनों का ऑर्डर देना होगा और इस बारे में एक या दो महीने में फैसला लेना होगा।

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त (CEC) ओम प्रकाश रावत ने कहा कि एक देश-एक चुनाव अभी कानूनन संभव नहीं है। उन्‍होंने कहा कि कानून में संशोधन के बाद ही एक साथ चुनाव संभव है। 11 राज्यों में एक साथ चुनाव की संभावना दिखती है।

वहीँ कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि फ़िलहाल ये सम्भव नहीं है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अशोक गहलोत ने एक देश एक चुनाव वाली बीजेपी की मांग पर कहा कि इसके लिए मोदी सरकार ईमानदार नहीं है और खर्चा बचाने का दिखावा करके पॉलिटिकल माइलेज लेना चाहती है।

गहलोत ने कहा कि साथ चुनाव कराने का एक ही रास्ता बचता है कि मोदी इस देश पर कृपा करके इस्तीफा दें और संसद भंग करें और चुनावों का ऐलान कर दें। उन्होंने कहा कि अगर मोदी ऐसा करते हैं, तो कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा का चुनाव साथ लड़ने को पूरी तरह से तैयार है।

वहीँ एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे व्यावहारिक बताया लेकिन साथ ही ये कहा कि ‘इस चुनाव में ये संभव नहीं है कि लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ किया जाए।’

गौरतलब है कि सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लॉ कमीशन को पत्र लिखकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने की मांग की थी। शाह ने अपने पत्र में लिखा था कि इससे चुनाव पर बेतहाशा खर्च पर लगाम लगाने और देश के संघीय स्वरूप को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

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