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बीजेपी के पूर्व मंत्री के पोते ने फर्जी ACB अफसर बनकर मांगे 10 करोड़

जयपुर। राजस्थान में दो बार बीजेपी एमएलए रहे और राज्य के पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर के पोते सहिल राजपालद्वारा फ़र्ज़ी एंटी करप्शन ब्यूरो का अफसर बनकर दस करोड़ रुपये मांगने का मामला प्रकाश में आया है। इतना ही नहीं यह फ़र्ज़ीवाड़े का धंधा बीजेपी के वर्तमान विधायक के सरकारी आवास से चल रहा था।

जानकारी के अनुसार बुधवार को ही इस मामले में साहिल राजपाल को एसीबी ने जयपुर से दबोचा है। वह बीजेपी के वर्तमान विधायक मोहनलाल गुप्ता के सरकारी निवास पर से अपना अड्डा चला रहा था। मामले में केस से अपना नाम हटाने के लिए जलदाय विभाग के एक इंजीनियर में बकायदा 1.5 लाख रुपये की पहली अदायगी भी कर दी थी।

स्पूफिंग, यानि दूसरे के मोबाइल नंबर यूज में लेकर यह कांड किया जा रहा था। इस मामले में आज कांग्रेस पार्टी बयानबाजी में हावी होती नजर आ रही है। साल 1998 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक रहे राधेश्याम गंगानगर वर्ष 2008 में बीजेपी से विधायक थे। साहिल राजपाल उन्हीं का पोता है। श्रीगंगानगर के कद्दावर नेता रहे राधेश्याम गंगानगर 1998 में राज्य की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री थे। एसीबी अफसर बनकर रुपये हड़पने के मामले कांग्रेस ने बीजेपी एमएलए मोहनलाल गुप्ता की भूमिका की भी सीबीआई से जांच करवाने की मांग की है।

इस प्रकरण में राजपाल को जहां से पकड़ा गया वह बीजेपी एमएलए मोहनलाल गुप्ता का ही सरकारी आवास है। पूरे प्रकरण पर आज अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जयपुर नगर निगम की पूर्व महापौर और कांग्रेस नेत्री ज्योति खंडेलवाल ने कहा है कि इस मामले सहित बीजेपी के वर्तमान विधायक मोहनलाल गुप्ता की भी सीबीआई जांच करवानी चाहिए।

दरअसल, साहिल राजपाल बीजेपी विधायक मोहनलाल गुप्ता के जालुपुरा स्थित सरकारी आवास से इस कारनामे को अंजाम दे रहा था। उसे बुधवार को ही एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा बनकर 10 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में एसीबी ने गिरफ्तार किया है। राजपाल पर आरोप है कि वह राजस्थान के जलदाय विभाग में हुए पाइप लाइन घोटाले के बाद घूसकांड को अंजाम देने वाली एसपीएमएल कंपनी के पदाधिकारियों से रिश्वत लेकर नाम हटाने के एवज में 10 करोड़ रुपये के लिए दबाव बना रहा था।

इसके लिए सहिल राजपाल ने अत्याधुनिक तकनीक काम में ली। स्पूफिंग यही एक माध्यम है जिसके द्वारा कोई भी, किसी भी व्यक्ति को फोन कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह चाहे जिसका नंबर अगले के मोबाइल में दिखाई देता है। इस तकनीक में यह भी पता नहीं चलता है कि जो कॉल किया गया है वह कहां से किया गया है। इस तकनीक के द्वारा राजपाल ने अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग व चीन सहित करीब 10 देशों के गेटवे स्पूफिंग का इस्तेमाल किया।

एसीबी के अनुसार, इसी साल फरवरी में राजपाल ने इंजीनियर सीएल जाटव से मामले में से उसका नाम हटाने के ऐवज में 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके लिए जाटव ने उसे 1.5 लाख रुपये दे दिए, लेकिन वह 10 लाख रुपये के लिए दबाव बनाता रहा। इस पर जाटव ने एसीबी में शिकायत कर दी। एसीबी ने देखा कि जाटव से पैसे मांगने के लिए जो मोबाइल और लैंण्डलाइन नंबर काम में लिया गया है, वह उन्हीं के एसपी शंकरदत्त शर्मा का ही है, लेकिन शर्मा ने इससे अनभिज्ञता जताई। जिसके बाद एसीबी के आईजी सचिन मित्तल ने 9 देशों से इस नंबर के आईपी एड्रेस पता किए। आश्चर्यजनक रुप से सभी कॉल्स का आईपी एड्रेस साहिल राजपाल का निकला।

क्या है स्पूफिंग कॉल?

एसीबी आईजी सचिन मित्तल ने बताया कि इस तरह के कॉल को वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल भी कहते हैं। कई विदेशी सॉफ्टवेयर कंपनियां इस तरह के सॉफ्टवेयर बनाती है। जिससे कॉल करने वाले को तो नंबर का पता होता, लेकिन रिसीव करने वाले व्यक्ति को उसके मोबाइल में वही नंबर दिखाई देता है जो कॉल करने वाला चाहता है। इस तरह के कॉल्स की रिकॉर्डिंग सहित कोई भी सबूत मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के पास नहीं होता है। केवल सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी के पास ही इस तरह के कॉल्स की डिटेल होती है।

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