बीजेपी की कोशिशों पर पानी फिरा: 220 लिंगायत मठों के संतों का कांग्रेस को समर्थन का एलान

बेंगलुरु। कर्नाटक में होने जा रहे विधानसभा चुनावो के लिए बीजेपी की कोशिशों पर उस समय पानी फिर गया जब 220 लिंगायत मठो के संतो ने कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला सुनाया।

कर्नाटक में मठो के इर्दगिर्द चल रही चुनावी राजनीति में इस बार कांग्रेस ने बीजेपी को मात दे दी है। रविवार को लिंगायत समुदाय के 220 मठों के संतों ने बेंगलुरू में बैठक कर कांग्रेस को चुनावों में समर्थन देने का एलान किया है।

इससे पहले शनिवार को लिंगायत समुदाय की पहली महिला संत माते महादेवी ने सिद्धारमैया को समर्थन देने का एलान किया था और लोगों से भी कांग्रेस को समर्थन देने की अपील की थी।

गौरतलब है कि कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म के तौर पर मान्यता देने की मांग लम्बे समय से चल रही थी और राज्य की कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समुदाय की मांग को मानते हुए लिंगायत समुदाय के धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देते हुए केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है।

पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म की मान्यता देने का समर्थन करने वाली बीजेपी अब इसे हिन्दुओं को बांटने की साजिश बता रही है। केंद्र को प्रस्ताव भेजकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है।

बता दें कि राज्य में करीब 18 फीसदी आबादी लिंगायत समुदाय की है जो परंपरिक तौर पर बीजेपी के वोटर माने जाते रहे हैं लेकिन इस बार सीएम सिद्धारमैया ने बीजेपी को उसी के दांव से चित्त कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार को बेंगलुरू के बसवा भवन में हुई लिंगायत मठों के संतों की बैठक में चित्रदुर्गा के मशहूर मुरुगा मठ के संत मुरुगा राजेंद्र स्वामी, बसवा पीठ के माते महादेवी और सुत्तुर मठ के संत समेत कुल 220 मठों के संत शामिल हुए। सभी ने चर्चा कर एकमत से कांग्रेस की सिद्धारमैया को समर्थन देने का फैसला किया है।

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