बसपा कांग्रेस से इसलिए डर रही बीजेपी

नई दिल्ली। 2019 के आम चुनावो में कम से कम 150 वर्तमान सांसदों के टिकिट कटने की खबर बीजेपी में जंगल में आग की तरह फैलने के बाद अपना टिकिट कटने से आशंकित बीजेपी सांसद अब सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं।

सूत्रों की माने तो बीजेपी में जिन 150 सांसदों के टिकिट कटने की आशंका जताई गयी हैं उनमे सर्वाधिक सांसद उत्तर प्रदेश के बताये जाते हैं, वहीँ राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के कई सांसदों के टिकिट कटने की आशंका है।

ऐसे में अगले चुनावो में टिकिट की उम्मीद लगाए बैठे सांसदों की उम्मीदों को ठेस लगी और उन्होंने अभी से टिकिट पक्का करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना शुरू कर दिया है।

कई राज्यो में क्षेत्रीय पार्टियां ऐसी स्थति में नहीं हैं कि उनसे टिकिट लेकर चुनाव जीता जा सके। इसलिए इन राज्यों में कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है। वहीँ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के सांसदों के पास कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय दल एक बड़ा विकल्प है।

सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश में टिकिट कटने से आशंकित सांसदों की पहली पसंद बहुजन समाज पार्टी है। इसका अहम कारण दलित, मुस्लिम मतों का कॉम्बिनेशन बताया जा रहा है।

दूसरी तरफ सपा की तिकड़मबाज़ियों से अलर्ट बसपा और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। इसके संकेत उस समय मिले जब खबर आयी कि बसपा सुप्रीमो बिजनौर या आंबेडकर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी लेकिन 2019 में बसपा सपा गठबंधन को लेकर बसपा ने ख़ामोशी नहीं तोड़ी।

जानकारों की माने 2019 में कांग्रेस और बसपा राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन कर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीँ उत्तर प्रदेश में सपा ने सीटों के बंटवारे को लेकर कोई पैतरेबाजी दिखाई तो बसपा, रालोद और कांग्रेस का गठजोड़ बन सकता है।

जानकारों के अनुसार बीजेपी को चिंता यह नहीं कि सपा बसपा यूपी में मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो उसे उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर घाटा हो सकता है बल्कि यदि बसपा कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन हुआ तो कई राज्यों में बीजेपी को नुक्सान झेलना पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस गुजरात विधानसभा चुनावो में की गयी गलती को दोहराना नही चाहती इसलिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन होना तय माना जा रहा है और कभी भी इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।

गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस को कई सीटों पर 2000 से भी कम वोटों से पराजय झेलनी पड़ी थी। जानकारों का कहना है कि यदि कांग्रेस ने बसपा के साथ गठबंधन किया होता तो आदिवासी और दलित बाहुल्य इलाको में बीजेपी को वोट जाने से रोका जा सकता था।

फिलहाल यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि इस बार उत्तर प्रदेश में बसपा बीजेपी के लिए बड़ा सिरदर्द है। चुनावी विशेषज्ञों के अनुसार 2019 में बीजेपी को 2014 वाली मोदी लहर का सहारा नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं 2014 के चुनावी वादे पूरे न होने के चलते पीएम मोदी के वाराणसी जैसी सीट पर बीजेपी के लिए मतदाताओं के सवालो के जबाव देना मुश्किल हो जायेगा।

फिलहाल कहा जा रहा है कि 2019 के चुनावो के एलान के बाद बीजेपी सांसदों में भगदड़ मच सकती है। पार्टी द्वारा टिकिट काटने की आशंका के चलते बीजेपी सांसदों का अन्य दलों में पलायन करना तय है।

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