बजट सत्र समाप्त: तीन तलाक बिल नहीं पास करा सकी मोदी सरकार

नई दिल्ली। मोदी सरकार के कार्यकाल का सम्भवतः अंतिम संसदीय सत्र समाप्त हो चूका है। तमाम दावों के बावजूद मोदी सरकार तीन तलाक बिल पास नहीं करा सकी है।

तीन तलाक पर सरकार के प्रस्तावित बिल को विपक्ष वापस सेलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग की थी। विपक्ष का कहना था कि इस बिल में कई खामियां हैं जिन्हे सुधारे जाने की ज़रूरत है।

तीन तलाक बिल को लेकर विपक्षी दलों ने कहा था कि सरकार इसे जल्दबाज़ी में पास कराना चाहती है। जबकि हम इस इस बिल को बिना आवश्यक संशोधनों के जस का तस पास नहीं होंगे देंगे।

शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने तीन तलाक बिल पर कहा था कि ‘यह इतना महत्वपूर्ण बिल है जो सकारात्मक और नकारात्मक तौर पर करोड़ों लोगों की जिंदगी को प्रभावित करेगी। इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे बिना पास नहीं किया जा सकता।’

उन्होंने कहा कि विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा किए बगैर इस बिल पर चर्चा मुमकिन नहीं है। आजाद ने कहा कि यह बिल काफी अहम है और कई लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। इसे बगैर किसी कमेटी में भेजे पारित करना ठीक नहीं है, सरकार बिल को पारित कराना चाहती है, सिर्फ इसके लिए इसे नहीं पारित किया जाना चाहिए।

अंततः विपक्ष की एकजुटता के आगे सरकार को घुटने टेकने पड़े और अपनी किरकिरी होने से बचने के लिए सरकार ने तीन तलाक बिल को बजट सत्र में फिर से राज्य सभा में पेश करने से परहेज किया।

गौरतलब है कि तीन तलाक से जुड़ा बिल लोकसभा में पास हो चूका है। इसे लागू करने के लिए राज्य सभा से भी पारित कराना आवश्यक है। लोकसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत है लेकिन राज्य सभा में बहुमत के आभाव के चलते मोदी सरकार विपक्ष के सहयोग के बिना इसे पास नहीं करा सकती।

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