फिर टला चारा घोटाले में लालू यादव की सजा का एलान

रांची। चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में आरोपी बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की सजा पर फैसला एक बार फिर टल गया है। अब सजा पर फैसला शनिवार के बाद आने की संभावना है।

इस मामले में सारे दोषियों की सुनवाई के बाद जज शिवपाल सिंह फैसला सुनाएंगे। शनिवार को छह दोषियों की सुनवाई होगी. शुक्रवार को राजा राम जोशी और महेश प्रसाद की भी सुनवाई पूरी हो गई। आज अब कोई सुनवाई नहीं होगी।

लालू यादव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई. राजद नेता की सजा पर सुनवाई शुरू हुई और 5 मिनट में सुनवाई पूरी हो गई. लालू के वकीलों ने कहा कि लालू को जिन धाराओं में दोषी करार दिया गया है।

इससे पहले लालू यादव की तरफ से वकीलों ने दलील दी कि लालू को किडनी की बीमारी है, डायबिटीज के मरीज है और उनका दिल का ऑपरेशन भी हो चुका है। ऐसे में लालू के लिए कम से कम सजा की मांग दी जाये।

लालू के वकील की ओर से कहा गया है कि बिरसा मुंडा जेल में कई सारे इन्फेक्शन होने का डर है इसलिए उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें कम सज़ा दी जाए। वकील ने कहा कि जेल में शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं है, इसलिए उनकी किडनी पर भी असर हो सकता है।

लालू यादव की कोर्ट में मौजूदगी के दौरान कोर्ट के बाहर हज़ारो समर्थको हुजूम जमा रहा। इस दौरान प्रशासन ने भारी भात्रा पुलिस बल का इंतजाम किया हुआ था।

क्या है मामला:

अदालत ने लालू यादव को धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप में आईपीसी की धारा 420, 120 बी और पीसी एक्ट की धारा 13( 2) के तहत दोषी पाया है। इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा और ध्रुव भगत समेत 6 लोगों को बरी कर दिया गया था।

साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर अवैध ढंग से 89 लाख, 27 हजार रुपये निकालने का आरोप है। इस दौरान लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। हालांकि, ये पूरा चारा घोटाला 950 करोड़ रुपये का है, जिनमें से एक देवघर कोषागार से जुड़ा केस है।

इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्टूबर, 1997 को मुकदमा दर्ज किया था। लगभग 20 साल बाद इस मामले में फैसले आया था। इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़, 70 लाख रुपये अवैध ढंग से निकालने के चारा घोटाले के एक दूसरे केस में सभी आरोपियों को सजा हो चुकी है।

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