पढ़िए: राफेल पर कैग रिपोर्ट की दस अहम बातें, विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन

नई दिल्ली। बुधवार को संसद के बजट सत्र का आखिरी दिन राफेल पर सरकार और विपक्ष के बीच तकरार जारी है। वहीं भारी विरोध के बीच राज्यसभा में कैग की रिपोर्ट पेश की गई। कैग रिपोर्ट में विमान के दाम नहीं बताए गए हैं।

संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों का मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत अन्य कांग्रेस नेताओं ने संसद परिसर में गांधी मूर्ति के पास राफेल मुद्दे पर प्रदर्शन किया।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि 126 विमानों की पुरानी डील से तुलना करें तो 36 राफेल विमानों का नया सौदा कर भारत 17.08% पैसा बचाने में कामयाब रहा है। बता दें कि मोदी सरकार के समय में 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा हुआ। इससे पहले यूपीए के समय में 126 राफेल का सौदा हुआ था पर कई शर्तों पर आम राय नहीं बन सकी थी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि 126 विमानों की पुरानी डील से तुलना में 36 राफेल विमानों का नया सौदा कर भारत 17.08% पैसा बचाने में कामयाब रहा है। वहीं, पुरानी डील के मुकाबले नई डील में 18 विमानों की डिलीवरी का समय बेहतर है। शुरुआती 18 विमान भारत को पांच महीने जल्दी मिल जाएंगे।

इधर, कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट पर प्रश्न खड़े किए हैं। 141 पेज की यह रिपोर्ट रखे जाने के बाद राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया जिसकी वजह से सभापति को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। वहीं, लोकसभा में भी टीडीपी और टीएमसी सदस्यों के हंगामे के कारण सुबह कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही फिलहाल 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

क्या है कैग रिपोर्ट में :

1 राफेल डील 2.86 फीसदी सस्ती है। CAG रिपोर्ट में राफेल विमान के दाम को नहीं बताया गया है।
2 बिल्कुर तैयार अवस्था में राफेल की कीमत UPA सरकार के जितनी ही है।
3 CAG की रिपोर्ट से मोदी सरकार का वो दावा भी खारिज होता है, जिसमें कहा गया था कि मोदी सरकार ने राफेल विमान 9 फीसदी सस्ता खरीदे हैं।
4 रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस डील (36 विमान) में पिछली डील (126 विमान) का करीब 17.08 फीसदी पैसा बचा है।
5 पिछली डील के मुताबिक, राफेल विमान की डिलीवरी 72 महीने में होनी थी लेकिन इस डील में 71 महीने में ही डिलीवरी हो रही है।
6 रक्षा मंत्रालय की ओर से जनवरी 2019 में बताया गया था कि नई डील में बेसिक प्राइस 9 फीसदी सस्ता है. ये 2007 में 126 विमान के लिए पेश ऑफर की तुलना में सस्ता था।
7 शुरुआती 18 राफेल विमान पिछली डील के मुकाबले 5 महीने पहले ही भारत में आ जाएंगे।
8 CCS के सामने सितंबर 2016 में सोवरन गारंटी और लेटर ऑफ कम्फर्ट पेश की गई थी. जिसमें तय हुआ था कि लेटर ऑफ कम्फर्ट को फ्रांस के प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
9 रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय को काफी चरणों में इस डील को फाइनल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
10 कैग रिपोर्ट में राफेल विमानों के दाम नहीं बताये गए हैं। साथ ही इस बात को लेकर भी खुलासा सही किया गया कि आखिर किन कारणों से कॉन्ट्रेक्ट एचएएल की जगह रिलायंस डिफेन्स को दिया गया।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें