प्रियंका की एंट्री के बाद नरम पड़े गठबंधन के तेवर, कांग्रेस को दिया ये ऑफर!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को अलग थलग डालने की कोशिशों के तहत 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बना सपा बसपा गठबंधन प्रियंका की एंट्री के बाद नरम पड़ गया है और गठबंधन के नेताओं को अब लगने लगा है कि यदि कांग्रेस को गठबंधन में साथ नहीं लिया तो गठबंधन उम्मीदवारों का हाल 2014 जैसा हो सकता है।

सूत्रों की माने तो प्रियंका के राजनीति में आने के बाद कांग्रेस को लेकर गठबंधन के नेताओं के नज़रिये में बड़ा परिवर्तन आया है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस को गठबंधन में अंदर लाने के लिए सपा बापसा नेताओं के बीच बात हो चुकी है और कांग्रेस को 14 सीटों का ऑफर दिया गया है लेकिन कांग्रेस ने 20 से कम सीटें मिलने पर असहमति जताई है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 23 सीटें मांग रही हैं। वहीँ कांग्रेस के 23 सीटों के दावे पर अब सपा बसपा में एक बार फिर मंथन चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि सपा बसपा नेताओं को अब यह समझ आ गया है कि रायबरेली और अमेठी को छोड़ भी किया जाए तब भी कांग्रेस उम्मीदवारों के चलते कम से कम 25 से 30 सीटों पर गठबंधन को बड़ा झटका लग सकता है और इसका फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को मिलना तय है।

सूत्रों ने कहा कि आज लखनऊ में कांग्रेस का रोड शो सम्पन्न होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के साथ बैठकर इस मामले में चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि अगले दो तीन दिन प्रियंका गांधी लखनऊ में मौजूद रहेंगी। ऐसे में संभावना है कि गठबंधन को लेकर एक बार फिर प्रियंका गांधी संकटमोचन की भूमिका अदा करें।

गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा- कांग्रेस के बीच गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा था। उस समय भी समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 25-30 सीटों से अधिक सीटें देने से मुकर गयी थी। तब प्रिंयका गांधी ने सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव से बात करने और सीटों के बंटवारे को हल करने में मध्यस्थ की भूमिका अदा की थी।

सूत्रों ने कहा कि संभव है कि अगले दो दिन में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किये जाने के मामले में चर्चा करें। सूत्रों ने कहा कि दिक्क्त अखिलेश यादव की तरफ से नहीं है बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती से है। मयावती किसी भी हाल में 35 सीटों से कम पर चुनाव लड़ना नहीं चाहती।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से साफतौर पर कहा गया है कि कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करने को लेकर सपा बसपा मिलकर 15 फरवरी तक फैसला ले लें। इसके बाद कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देना शुरू कर देगी। बता दें कि अकेले चुनाव लड़ने की शर्त पर कांग्रेस ने सभी 80 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का एलान किया है।

सूत्रों ने कहा कि अगले दो दिन में तस्वीर के और साफ़ होने कोई उम्मीद है। हालाँकि सूत्रों ने कहा कि मायावती शासनकाल में बने पार्को और मूर्तियों पर किये गए खर्च को लेकर आये सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती पर भारी दबाव है कि वह विपक्ष को साथ लेकर चलें।

गौरतलब है कि बसपा शासनकाल में बनवाये गए पार्को और मूर्तियों को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मूर्तियों पर किया गया खर्च बसपा सुप्रीमो मायावती को सरकारी खजाने में जमा करना चाहिए। फ़िलहाल देखना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बने सपा बसपा गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किये जाने के मामले में बसपा सुप्रीमो के रुख में कितना बदलाव आता है।

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