प्रवीण तोगड़िया की इस किताब से घबराये संघ और बीजेपी, तोगड़िया को हटाने की कोशिश विफल

नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया अपनी किताब “सैफरॉन रिफ्लेक्शन-फेसेस एंड मास्क्स” अगले वर्ष जनवरी में लांच हो रही है। इस किताब में राममंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी की राजनीति की सच्चाई के बारे में कई चीज़ें ऐसी हैं जिन्हे बीजेपी परदे के पीछे ही रखना चाहती है।

जानकारी के अनुसार इस किताब में प्रवीण तोगड़िया ने लिखा है कि सत्ता तक पहुँचने के लिए बीजेपी ने राम मंदिर मुद्दे को किस तरह सीढ़ियां बनाकर इस्तेमाल किया है। इस किताब के माध्यम से विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने यह बताने की कोशिश की है कि भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर के नाम पर हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया है।

सूत्रों के मुताबिक इस किताब में तोगड़िया ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी ने हिन्दुओं को राम मंदिर, धारा 370, कॉमन सिविल कोड, बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजना, गोवंश हत्या बंदी, विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं को फिर से बसाने के सवाल पर सिर्फ सपने दिखाए और उन्हें गुमराह किया है।

सूत्रों के अनुसार किताब में लिखा है कि जब चुनाव आते हैं तो बीजेपी फिर से इन्ही मुद्दों के इर्दगिर्द बातें करना शुरू कर देती है। हिन्दू समुदाय की भावनाओं से खेलकर वोट लेती है और सत्ता में आते ही यूटर्न ले लेती है।

सूत्रों के मुताबिक किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मुद्दे पर भी कड़े प्रहार किये गए हैं। किताब में विकास के मुद्दे के बारे में लिखा है कि “हिन्दुओं के मुद्दों से टोटल यू टर्न का नाम ही विकास है।

संघ द्वारा तोगड़िया को हटाने की कोशिश नाकाम :

संघ सूत्रों की मानें तो ओडिशा के भुवनेश्वर में हुई विहिप की तीन दिवसीय केंद्रीय प्रन्यासी मंडल एवं प्रबंध समिति अधिवेशन की बैठक में विहिप से प्रवीण तोगड़िया को पदमुक्त करने की कवायद थी। मगर समर्थकों के हंगामे और उनके दबाव की वजह से तोगड़िया विहिप के अध्यक्ष पद पर बरकरार रहने में कामयाब रहे हैं।

विहिप अध्यक्ष पद पर कोगजे को बैठाने के साथ ही संघ का प्रयास तोगड़िया को विहिप अध्यक्ष पद से हटाने का था। बताया जाता है कि तोगड़िया के रिश्ते पीएम मोदी से बेहतर नहीं हैं। दोनों के तल्ख रिश्तों की चर्चा पहले भी रही है।

कई मौकों पर तोगड़िया सार्वजनिक रूप से मोदी के कामकाज का विरोध कर चुके हैं। मोदी और तोगड़िया के तल्ख रिश्ते पहले से जगजाहिर हैं। शायद यही वजह है कि संघ तोगड़िया को विहिप से पदमुक्त कर 2019 के लिए मोदी की राह पूरी तरह से आसान बनाने में जुटा था। मगर संघ की कोशिश नाकाम रही है। विहिप के अंतराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पद पर राघव रेड्डी तो कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में प्रवीण तोगड़िया बरकरार रहे हैं। संघ की पसंद के कोगजे अध्यक्ष नहीं बन पाए।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) अध्यक्ष के मामले में संघ को मात खानी पड़ी है। संघ के पसंदीदा व्यक्ति को विहिप अध्यक्ष पद की कमान नहीं मिल सकी है। संघ ने अध्यक्ष पद के लिए हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल जस्टिस कोगजे के नाम को आगे बढ़ाया था। मगर प्रवीण तोगड़िया के समर्थकों के आगे संघ की पसंद परवान नहीं चढ़ सकी। मजबूरी में संघ आलाकमान को विहिप के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष पद पर पुरानी जोड़ी को ही बनाए रखना पड़ा है। बताया जा रहा है कि संघ के सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। वरना चुनाव तक कि नौबत आन पड़ी थी।

सूत्र बताते हैं कि भुवनेश्वर में सम्पन्न हुई विहिप-केन्द्रीय प्रन्यासी मण्डल एवं प्रबंध समिति संयुक्त अधिवेशन के अंतिम दिन शुक्रवार 29 दिसम्बर को हंगामे के बीच अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग तक कि नौबत आ गई थी। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार संघ की तरह विहिप में भी हर तीन साल बाद अध्यक्ष पद का चुनाव होता है। उस कवायद के तहत ही इस दफे अधिवेशन में विहिप अध्यक्ष का चुनाव होना था। जब तक अशोक सिंघल विहिप के कर्ता-धर्ता रहे तब तक उन्हीं की राय मान्य होती थी। मगर उनके बाद विहिप की व्यवस्था भी संघ के अधीन हो गई।

विहिप अध्यक्ष के चयन में संघ का सम्मान रखते हुए उसके जरिये सुझाए नाम को ही मानने की परंपरा रही है। मगर इस बार ऐसा नहीं हो सका है। संघ ने इंदौर के रहने वाले कोगजे के नाम को अध्यक्ष पद पर अपनी पसंद के रूप में भेजा था। लेकिन बैठक में विहिप सदस्यों को यह नाम रास नहीं आया और उन्होंने इसका विरोध किया जिसके बाद चुनाव तक कि नौबत आ गई।

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