प्रयागराज धर्म संसद: राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी के खिलाफ आलोचना प्रस्ताव पास

प्रयागराज। कुंभ मेले में शुरू हुई तीन दिन की धर्म संसद के पहले दिन आज राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की गयी। धर्म संसद में भाग ले रहे साधु संतो ने राम मंदिर निर्माण में देरी के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य की सरकारों को दोषी ठहराया।

इतना ही नहीं साधू संतो की सहमति बनी तो धर्म संसद में बीजेपी के खिलाफ आलोचना प्रस्ताव पेश किया गया। धर्म संसद में यह आलोचना प्रस्ताव बिना विरोध पास हुआ।

इस धर्म संसद की अगुआई ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती कर रहे हैं। इस धर्म संसद में कई देशो के प्रतिनिधियो के शामिल होने की उम्मीद जताई गयी है।

धर्म संसद में साधू संतो को सम्बोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा, ”राम मंदिर को लेकर संत समाज और जनता को गुमराह किया गया। सत्ता में बैठे लोग मंदिर का निर्माण नहीं करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रयाग से राम मंदिर के शिलान्यास का खाका तैयार किया जाएगा।”

वहीँ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि “राम मंदिर को लेकर भाजपा का नजरिया साफ नहीं है। प्रधानमंत्री ने सत्ता मिलने के बाद एक बार भी अयोध्या का रुख नहीं किया।”

धर्म संसद में साध्वी पूर्णांबा ने मोदी सरकार के खिलाफ आलोचना प्रस्ताव पेश किया, जिसे संसद ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। प्रस्ताव के मुताबिक, पिछले साल वाराणसी में हुई परम धर्म संसद में केंद्र सरकार को राम मंदिर मसले को राष्ट्रीय हित का मुद्दा घोषित करने का सुझाव दिया गया था। ऐसा करने पर कोर्ट 2 हफ्ते में फैसला देने के लिए बाध्य है। लेकिन सरकार इसके लिए अध्यादेश नहीं ला पाई।

इस धर्म संसद में शामिल होने के लिए देश के प्रमुख राजनैतिक दलों को न्यौता भेजा गया था लेकिन धर्म संसद के पहले दिन सिर्फ भाजपा सांसद गोपाल नारायण सिंह और सपा नेता रेवती रमण सिंह पहुंचे।

बीजेपी सांसद गोपाल नारायण सिंह ने अपने सम्बोधन में राज्य सभा में बहुमत न होने का रोना रोया। उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक दायरे से बाहर नहीं जा सकते। हमारे पास लोकसभा में बहुमत है लेकिन राज्य सभा में हमारे पास बहुमत नहीं है। वहीँ सपा नेता रेवती रमण सिंह ने खुद को राम मंदिर निर्माण से जुडी चर्चा से अलग करते हुए कहा कि वे गंगा की सफाई को लेकर बात करने आये हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने अयोध्या में विहिप द्वारा आयोजित धर्म सभा में केंद्र की मोदी सरकार से कानून बनाकर राम मंदिर निर्माण की मांग वाला प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में कानून बनाकर मंदिर निर्माण पर असमर्थता जताते हुए सुप्रीमकोर्ट के फैसले का इन्तजार करने की बात कही थी।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें
Loading...