प्रधान से मेल – अवैध कब्जे का खेल, बाकी सब फेल

ब्यूरो (राम मिश्रा,अमेठी): ग्राम पंचायत में विकास की गंगा बहाने के लिए जनता अपने बहुमूल्य वोट के द्वारा ग्राम प्रधानों को चुनती है। बहुत सारी आशा और अपेक्षायें लगाकर बैठती है।

यदि आशा के अनुरूप प्रधान ही उतर गए तो अपने दिए गए वोट को जनता सार्थक मानती है लेकिन अगर विकास के नाम पर प्रधान जैसा जनप्रतिनिधि या फिर ‘प्रधान के चहेते लोग’ लूट-घसोट और जनता के उपयोग की ज़मीन पर अपना कब्ज़ा जमाने लगे तो जनता खुद को ठगा महसूस करती है। कुछ यहीं हाल जिले के मुसाफिरखाना विकासखण्ड के पूरे परवानी गाँव का है ।

पंचायत भवन सहित जमीन पर कब्जे का आरोप-

इस गांव में विकास के कार्यों का खाका बनाने के लिए लाखो रुपये ख़र्च कर पंचायत भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन यहाँ के पंचायत भवन पर प्रधान समर्थको ने कई महीनों से कब्जा कर रखा है।

यहाँ दबी जुबान लोगो का कहना कि अतिक्रमणकारियो ने पंचायत भवन के साथ साथ प्रधान से मिली भगत कर उसके सामने की जमीन पर भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। जिसके कारण यहाँ पंचायत भवन सहित सरकारी जमीन को भी अवैध कब्जों से मुक्त कराने में जुटे प्रशासन के लिए एक नई चुनौती सामने आ गई है।

सबसे बड़ा सवाल-

पूरे परवानी के ग्रामीणों का कहना है की शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ने एक प्रधान समर्थक ने गाँव में लाखो की कीमत से तैयार पंचायत भवन में अवैध कब्जा कर रखा है और शासन के निर्देशों का माखौल उड़ रहा है।

विभाग द्वारा पंचायत भवन बनाया गया था जिसमें गांव के विकास कार्य व अहम बैठकों का आयोजन होना था और जिससे गांव में होने वाले कार्यों की जानकारी लोगों को ब्लाक के कर्मचारी व प्रधान देते थे। वही भला कैसे गांव के विकास कार्यों व अन्य योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को मिले ?

जबाबदेही से भागते दिखे प्रधान पति-

वही जब मामले को लेकर प्रधान प्रतिनिधि पूरे परवानी सिराज अहमद से बात की गई तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया ।

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