पूर्वांचल में बीजेपी का रथ रोक सकती हैं प्रियंका, प्रयागराज से चुनाव लड़ने की अटकलें

लखनऊ ब्यूरो। प्रियंका गांधी के सक्रीय राजनीति में कदम रखने के साथ ही अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे लोकसभा चुनाव किस सीट से लड़ेंगी। वैसे आज कोंग्रेसी हलकों में यह चर्चा बेहद गर्म है कि प्रियंका गांधी प्रयागराज (इलाहाबाद) से चुनाव लड़ सकती हैं।

सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बेहद सधी हुई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही कांग्रेस इलाहाबाद से प्रियंका गांधी को मैदान में उतारकर एक बार फिर इलाहाबाद सीट पर कांग्रेस की वापसी कराने की तैयारी में हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 1957 और 1962 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री विजयी हुए थे। 1967 और 1971 लोकसभा चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के कब्ज़े में बनी रही। 1967 में इस सीट पर बतौर कांग्रेस उम्मीदवार एच कृष्णा और 1971 में इस सीट पर हेमबती नंदन बहुगणा विजयी हुए थे।

इसके बाद 1977 में जब देशभर में कांग्रेस विरोधी हवा चली तो इलाहाबाद सीट पर कांग्रेस की पराजय हुई और इस सीट पर भारतीय लोकदल के उम्मीदवार के तौर पर जनेश्वर मिश्र ने जीत दर्ज की। वहीँ 1980 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस ने एक बार फिर अपने कब्ज़े में ले ली। इस सीट पर बतौर कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने विजय दर्ज की।

इस सीट पर 1981 में विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा लोकसभा से इस्तीफा दिए जाने के कारण हुए उपचुनाव में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद लगातार दो लोकसभा चुनाव में 1984 के लोकसभा चुनाव और 1988 के लोकसभा उप चुनाव में भी इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रहे। 1984 में इस सीट पर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन और 1988 में अमिताभ बच्चन के लोकसभा से इस्तीफा देने के कारण हुए उपचुनाव में इस सीट पर विश्वनाथ प्रताप सिंह बतौर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीते थे।

इसके बाद यह सीट कांग्रेस के हाथो से जाती रही। 1989 में इस सीट पर जनतादल उम्मीदवार जनेश्वर मिश्र ने विजय दर्ज की। वहीँ 1991 में जनता दल उम्मीदवार सरोज दुबे विजयी रहे। इसके बाद लगातार तीन चुनावो में इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार विजयी रहे हैं। वर्ष 1996,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बतौर बीजेपी उम्मीदवार मुरलीमनोहर जोशी ने जीत हासिल की है।

इसके बाद वर्ष 2004 और 2009 में इलाहाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्ज़ा रहा लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर बीजेपी के कब्ज़े में आ गयी है।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस इलाहाबाद से प्रियंका गांधी को उम्मीदवार बनाकर पूर्वांचल में बड़ा सन्देश देना चाहती है। पार्टी सूत्रों ने कहा कि इलाहाबाद का सन्देश वाराणसी, कानपुर से लेकर भदोई, फतेहपुर,फूलपुर, मिर्ज़ापुर, बांदा और रॉबर्ट्सगंज तक जाएगा।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक चूँकि प्रियंका गांधी को पूर्वांचल का प्रभार भी दिया गया है इसलिए माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी इलाहाबाद से अपने चुनाव के साथ साथ पूर्वांचल में आने वाली 26 लोकसभा सीटों पर पूरा समय दे सकती हैं।

हालाँकि आधिकारिक तौर पर प्रियंका गांधी ने अभी अपना पदभार ग्रहण नहीं किया है लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में प्रियंका गांधी को महासचिव बनाये जाने के बाद भारी जोश है।

फिलहाल देखना है कि चुनाव लड़ने को लेकर प्रियंका स्वयं क्या फैसला लेती हैं। चूँकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कह चुके हैं कि चुनाव लड़ने का फैसला प्रियंका गांधी को करना है कि वे चुनाव लड़ना चाहती हैं अथवा नहीं। इसलिए तमाम कयासों के बावजूद अभी थोड़ा इंतज़ार करना होगा। जब प्रियंका गांधी आधिकारिक तौर पर कांग्रेस महासचिव का पदभार ग्रहण कर लेंगी उसके बाद ही उनके चुनाव लड़ने को लेकर तस्वीर साफ़ हो पाएगी।

बीजेपी का विजय रथ रोकने में सक्षम हैं प्रियंका:

2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज की थी लेकिन माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी को पूर्वांचल का प्रभार दिए जाने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए अपनी सभी सीटें बचाये रखना आसान नहीं होगा।

कभी पूर्वांचल में गहरी जड़ो के लिए पहचान बनाने वाली कांग्रेस इस बार प्रियका गांधी के ज़रिये एक बार फिर पूर्वांचल में अपनी पुरानी जड़ें तलाशने की कोशिश करेगी। जानकारों की माने तो प्रियंका गांधी बीजेपी के विजय रथ को पूर्वांचल में ही थामने के प्रयास करेंगी।

प्रियंका गांधी के सक्रीय राजनीति में आने से बीजेपी के लिए ताजा सरदर्दी यह है कि अब पूर्वांचल में पिछले चुनाव की तरह उसकी राहें आसान नही रहीं और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सामने पूर्वांचल की सीटें बचाये रखने की बड़ी चुनौती होगी। वहीँ प्रियंका गांधी बीजेपी को उसके घर में घुसकर कड़ी चुनौती पेश करेंगी।

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