पूरे चुनाव में नहीं, अचानक परिणामो में दिखी मोदी लहर

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को मिली बड़ी सफलता के बाद चुनाव विश्लेषक अचानक परिणामो में दिखी मोदी लहर को लेकर आंकलन कर रहे हैं। लोकसभा चुनावो के दौरान ज़मींन पर दूर दूर तक कोई लहर दिखाई नहीं दी लेकिन जब परिणाम आना शुरू हुए तो लगा जैसे देश में 2014 के लोकसभा चुनाव जैसी मोदी लहर मौजूद थी।

उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन और बिहार में महागठबंधन बनने के बाद दोनों राज्यों के जातीय समीकरण पूरी तरह से बीजेपी के खिलाफ थे इसके बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार में बीजेपी का उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन जातिगत राजनीति से उम्मीद लगाए बैठे दलों के लिए एक सबक ज़रूर है।

चुनाव के दौरान ज़मीनी हकीकत बीजेपी के पक्ष में नहीं दिखी। उत्तर प्रदेश में कई लोकसभा क्षेत्रो में बीजेपी के जिन उम्मीदवारों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, अंततः वे उम्मीदवार भी अपनी सीटें जीतने में कामयाब रहे हैं।

वहीँ चुनाव परिणामो में दिखी बीजेपी की लहर से कांग्रेस के 05 पूर्व मुख्यमंत्रियों को पराजय का सामना करना पड़ा है। लोकसभा चुनाव के दौरान माना जा रहा था कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपनी अपनी सीटें जीत सकते हैं। लेकिन जब मतगणना शुरू हुई तो पासा पलट गया।

इतना ही नहीं बिहार की अहम मानी जाने वाली पटना साहिब सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर फिल्म अभिनेता राजबब्बर को भी पराजय का सामना करना पड़ा है। वहीँ कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली अमेठी लोकसभा सीट भी इस बार कांग्रेस के हाथो से फिसल गयी है।

कांग्रेस सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव के दौरान दो बार दूसरे और चौथे चरण के चुनाव के बाद मिली इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में यूपीए बढ़त बनाये हुए था। राज्यों से मिली आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में भी कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले चुनाव की तुलना में कहीं अधिक बेहतर बताया गया था।

हालाँकि कि चुनाव परिणामो में दिखी बीजेपी की लहर पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नज़र नहीं आयी। ओडिशा और आंध्र प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावो में बीजू जनता दल और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस की सरकार बनाना तय हो गया है।

2014 की तर्ज पर आये लोकसभा चुनाव परिणाम से करीब 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। इनमे आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, चंडीगढ़, दादरा नागर हवेली, दमन दीव, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, मणिपुर, दिल्ली, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड शामिल हैं।

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