पाटीदार, ओबीसी और दलित छिटके तो मुसलमानो पर डोरे डाल रही बीजेपी

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव में इस पर पिछले चुनावो से पलट समीकरण बदले हैं। पिछले चुनावो में पाटीदार, ओबीसी और दलित मतदाताओं को बीजेपी का ठोस मत माना जाता था लेकिन इस बार माहौल बदला हुआ है।

पाटीदार मतदाताओं की एक बड़ी तादाद बीजेपी से दूरी बना चुकी है वहीँ ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस में जाने से कभी बीजेपी से जुड़े रहे ओबीसी मतदताओं का एक बड़ा हिस्सा भी पार्टी से छिटक गया है। ऊना काण्ड के बाद दलित मतदाताओं की सोच भी बदली है, वे बीजेपी से नाराज़ हैं और वे इस बार पहले से अधिक एकजुट दिख रहे हैं।

गुजरात में जातीय समीकरणों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। यहाँ राज्य के अलग अलग भागो में अलग अलग समीकरण रहते हैं इसके बावजूद चुनाव में पाटीदारो, ओबीसी और दलित मतदताओं की अहम भूमिका होती है।

सूत्रों की माने तो फ़िलहाल बीजेपी ने अपनी रणनीति बदल ली है। वह परम्परागत वोटो में से छिटके एक बड़े हिस्से को पूरा करने के प्रयासों के तहत मुसलमानो को लुभाने की कोशिश में जुट गयी है। इसके लिए बीजेपी ने एक ख़ास तौर पर वीडिओ भी जारी किया है।

इस वीडियो में एक मुस्लिम महिला को यह कहते दिखाया है कि हमे तीन तलाक से मोदी जी ने ही निजात दिलाई है, इसलिए इस चुनाव में हम इंशाल्लाह बीजेपी को ही वोट देंगे। जबकि इससे पहले बीजेपी ने एक और वीडियो जारी किया था जिसमे एक युवती को खौफ से सड़क पर तेज चलते दिखाया गया था और बैकग्राउंड में अज़ान की आवाज़ सुनाई देती है। इस वीडियो के खिलाफ मानवाधिकारों से जुड़े कुछ लोगों ने आवाज़ भी उठायी थी।

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी की इस चुनाव में क्या स्थति है इसका अंदाज़ा सभाओं में जुट रही कम भीड़ से पार्टी नेताओं को हो गया है और अब अंदरूनी तौर पर बीजेपी नेता दबी ज़ुबान में यह स्वीकारने लगे हैं कि चुनावो में पार्टी की हालत ठीक नहीं हैं।

सूत्रों ने कहा कि कई प्रत्याशियों ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से निवेदन किया है कि उनके क्षेत्र में किसी अन्य राज्य के नेता की सभा न रखी जाए, खासकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की। सूत्रों ने कहा कि जिन प्रत्याशियों ने अमित शाह से ऐसा निवेदन किया है वे उन विधानसभाओं में चुनाव लड़ रहे हैं जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 20 हज़ार से अधिक है।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी के सामने बड़ी मुश्किल यही है कि यदि वह मुस्लिम मतों की खातिर अपनी हार्डकोर हिंदुत्व वाली छवि से पीछे हटती है तो उसे अपने हिंदुत्व वाले परम्परागत मतों से हाथ धोना पड़ सकता है। वहीँ यदि पार्टी हार्डकोर हिंदुत्व एजेंडे को फॉलो करती है तो मुस्लिम मतदाताओं के वोट नहीं मिलेंगे।

वहीँ ज़मीनी हकीकत देखें तो तीन तलाक पर मोदी सरकार के दखल को लेकर स्थानीय मुस्लिमो में नाराज़गी है। बीजेपी ने भले ही वीडियो में एक महिला को तीन तलाक ख़त्म कराने का श्रेय नरेंद्र मोदी को देते हुए दिखाया हो लेकिन ज़रूरी नहीं कि यह वीडियो सभी मुस्लिमो के गले उतरे।

फिलहाल बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चिंता अपना दुर्ग बचाने की है। पीएम मोदी और बीजेपी के स्टार प्रचारकों की सभाओं में भीड़ न जुटने से बड़े दबाव का सामना कर रही बीजेपी फिलहाल मुसलमानो पर डोरे ज़रूर डाल रही है। लेकिन क्या वह अपने इस काम में सफल हो पाएगी? यह आने वाले समय में साफ़ हो जाएगा।

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