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पाटीदारो के व्हाट्सएप ग्रुप बने बीजेपी के लिए सरदर्दी

सूरत। पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुपो को लेकर बीजेपी बेचैन है। इस बेचैनी का बड़ा कारण है पाटीदारो का आपस में तुरंत संवाद।

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति द्वारा के मुख्य ग्रुप मे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल सहित सभी कोर्डिनेटर और कोर कमेटी के सदस्य और पदाधिकारी जुड़े हुए हैं। वहीँ दक्षिण गुजरात की अलग अलग विधानसभाओं में पाटीदारो के अलग अलग ग्रुप हैं। जिनकी देखरेख कॉर्डिनेटरो द्वारा की जाती है। इन ग्रुपो के माध्यम से हार्दिक पटेल और पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के कार्यक्रमो की सूचना दी जाती है।

इतना ही नहीं इन ग्रुपो के माध्यम से पाटीदारो को एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ मतदान करने की वजह भी बताई जाती है। सूत्रों की माने तो पाटीदार सदस्यों को आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए पुलिसया ज़ुल्म से लेकर बीजेपी द्वारा 22 वर्षो में पाटीदारो को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने की पूरी पूरी जानकारी दी जाती है।

सवाल यह उठता है कि बीजेपी को पाटीदारो के व्हाट्सएप ग्रुपो से क्या दिक्क्त हो सकती है। दरअसल पाटीदारो के व्हाट्सएप ग्रुप अब गाँव देहात तक पहुँच चुके हैं। बीजेपी की प्रचार टीम के गाँव में आने की खबर व्हाट्सएप पर फलेश होते ही पाटीदार तुरंत इकट्ठे हो जाते हैं और अपना विरोध जताते हैं।

बीजेपी की सबसे बड़ी मुश्किल पीएम मोदी और सीएम विजय रूपानी जैसे बीजेपी के कद्दावर नेताओं की सभाओं में भीड़ न जुटने को लेकर है। इस बार बीजेपी की सभाओं से पाटीदार गायब हैं। पाटीदार बाहुल्य कहे जाने वाले दक्षिण गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी की सभाओं में भी भीड़ नहीं जुट रही।

वहीँ पाटीदारो के आपस के संवाद ने बीजेपी की नींद उड़ा दी है। बीजेपी की रणनीति बनने से पहले ही पाटीदार उसे व्हाट्सएप ग्रुपो में छापना शुरू कर देते हैं। पाटीदारो को रिझाने के लिए बीजेपी उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल को सीएम के तौर पर पेश करने का मन बना रही है।

नितिन पटेल को सीएम के तौर पर पेश करने के बारे में बीजेपी में भले ही चर्चा हुई हो या नहीं लेकिन पाटीदारो के व्हाट्सएप ग्रुपो में ये मुद्दा छाया रहा और पाटीदारो को आगाह कर दिया गया कि बीजेपी पाटीदारो के वोट लेने के लिए यह नया फॉर्मूला लेकर आ सकती है इसलिए पाटीदार सतर्क रहें।

पाटीदारो को लेकर बीजेपी कोई भी दावा क्यों न करें लेकिन सच्चाई यही है कि गुजरात में बीजेपी फिलहाल पाटीदारो की एकता में सेंध लगाने में फेल रही है।

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