पाटीदारो के इस नए नारे से बीजेपी की फजीहत

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को पाटीदारो के आक्रोश से रूबरू होना पड़ रहा है। हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं कि पाटीदार बाहुल्य इलाको में बीजेपी के खिलाफ पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं।

पाटीदारो के विरोध का यह मामला सिर्फ गाँव देहात तक सीमित नहीं है बल्कि शहरी इलाको में पाटीदार बाहुल्य आवासीय सोसायटियों में भी मेंन गेट पर बीजेपी के खिलाफ बैनर लगा दिए गए हैं। जिनमे लिखा है कि “इस सोसायटी में धारा 144 लगी हुई है। मेहरबानी करके कोई कमल वाला (बीजेपी) इस सोसायटी में वोटो की भीख मांगे ने लिए प्रवेश न करे।”

वहीँ दूसरी तरफ पाटीदारो द्वारा दिए गए नए नारे से बीजेपी की फजीहत बढ़ गयी है। गुजरात के कई इलाको में पाटीदारो द्वारा लगाए गए बैनरो में “सरदार (सरदार पटेल) लड़े थे गोरों (अंग्रेजो) से, हम लड़ रहे चोरो से,” वहीँ बीजेपी की फजीहत वाला एक और दूसरा नारा “सरदार ने भगाया गोरों को, हम भगाएंगे चोरों को” लिखा गया है।

कभी बीजेपी का परम्परागत वोट बैंक माने जाने वाले पाटीदार समुदाय के लोगों में इस बार बीजेपी को लेकर इस कदर विरोध है कि वे बीजेपी के प्रचार वाहनों पर अंडे और टमाटर फेंक रहे हैं। इतना ही नहीं सूरत और आसपास के इलाको में तो बीजेपी का प्रचार करने निकले लोगों को देखते ही पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े कार्यकर्त्ता एकत्रित होकर बीजेपी के खिलाफ नारे लगाते हैं और हूटिंग करते हैं।

शुक्रवार को सूरत में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता जब अपने जनसंपर्क अभियान पर निकले तो पाटीदार के लोग उनसे भिड़ गए। पाटीदारों ने बीजेपी के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इन नारों में ‘जय सरदार जय पाटीदार’, और ‘सरदार लड़े थे गोरों से हम लड़ेंगे चोरों से’ जैसे नारे शामिल हैं। इससे पहले पाटीदारो ने बीजेपी की गौरव यात्रा पर सवाल उठाये थे और उन्होंने गौरव यात्रा को कौरव यात्रा का नाम दिया था।

दरअसल पाटीदारो और बीजेपी में बीच उस समय गहरी खाई पैदा हो गयी जब पाटीदारो ने आरक्षण की मांग को लेकर गुजरात में आंदोलन शुरू किया। इस दौरान हुई हिंसा में सरकारी सम्पत्ति के नुकसान का आरोप लगाते हुए सरकार की तरफ से पाटीदारो के खिलाफ कानूनी कार्रवाही करते हुए पाटीदार नेता हार्दिक पटेल सहित करीब दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किये गए।

आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाही में 14 लोगों की मौत के बाद बीजेपी और पाटीदारो के बीच पैदा हुई खाई और गहरी हो गयी। वहीँ पाटीदार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हार्दिक पटेल को जेल भेजने और उन्हें तड़ीपार करने के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए पाटीदारो में बीजेपी के खिलाफ पैदा हुए आक्रोश को और गहरा कर दिया।

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