पश्चिम बंगाल में दीदी नहीं सीपीएम है कांग्रेस की पसंद, सीटों का बंटवारा जल्द

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य स्तर पर अलग अलग दलों से गठबंधन कर रही कांग्रेस पश्चिम बंगाल में सीपीएम के साथ गठबंधन करने जा रही है। दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में हैं और 3 फरवरी की रैली के बाद औपचारिक रूप से गठबंधन और सीटों के बंटवारे का एलान किया जाएगा।

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल में राज्य कांग्रेस 18 से 20 सीटों पर अपना दावा पेश कर रही है। इन सीटों में रायगंज और मुर्शिदाबाद की वो दो सीटें भी शामिल हैं जो कि सीपीएम 2014 के लोकसभा चुनाव में जीतने में कामयाब रही थी। बंगाल में सीपीएम के हाथ 2014 में यही दो सीटें लगी थी. ऐसा माना जा रहा है इन्हीं दो सीटों के वजह के दोनों पार्टियों के बीच में पेंच फंसा हुआ है।

वहीँ पार्टी सूत्रों की माने तो पश्चिम बंगाल में गठबंधन को लेकर तृणमूल कांग्रेस वही रुख दिखा रही थी जो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने दिखाया है। सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में 10 जीतों से अधिक देने को तैयार नहीं थीं इसलिए मजबूरन कांग्रेस को अपना निर्णय पलटना पड़ा।

सूत्रों ने कहा कि चूँकि केरल में कांग्रेस वामदलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का मन बना रही है इसलिए पश्चिम बंगाल में भी अब वामदलों के साथ गठबंधन को प्राथमिकता देगी।

गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में 42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने सर्वाधिक 34 सीटें जीती थीं, कांग्रेस ने 04 सीटें जीती थीं तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने 02 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में दो सीटें जीतने वाली सीपीएम वोट शेयर के हिसाब से राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी थी।

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