नौकरियों को लेकर गडकरी के मूँह से निकली सच्चाई, फिर मुकर गए

नई दिल्ली। देश में नौकरियों की कमी को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मूँह से सच्चाई निकल गयी लेकिन बाद में उन्होंने अपने कहे से यूटर्न ले लिया और अपने कहे से मुकर गए।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने औरंगाबाद में कहा कि आरक्षण रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गडकरी ने कहा कि एक ‘‘सोच’’ है जो चाहती है कि नीति निर्माता हर समुदाय के गरीबों पर विचार करें।

गडकरी महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए मराठों के वर्तमान आंदोलन तथा अन्य समुदायों द्वारा इस तरह की मांग से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि आरक्षण दे दिया जाता है। लेकिन नौकरियां नहीं हैं। क्योंकि बैंक में आईटी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। सरकारी भर्ती रूकी हुई है। नौकरियां कहां हैं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक सोच कहती है कि गरीब गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिन्दू या मराठा (जाति), सभी समुदायों में एक धड़ा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘एक सोच यह कहती है कि हमें हर समुदाय के अति गरीब धड़े पर भी विचार करना चाहिए।’’

वहीँ अब नितिन गडकरी ने अपने कहे से यूटर्न ले लिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने सफाई दी है कि नितिन गडकरी का ट्वीट डीलिट कर दिया गया है। यह मराठी से अंग्रेजी में अनुवाद करने में हुई एक भूल थी।

वहीँ केंद्रीय मंत्री ने ट्विटर पर कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आये मेरे बयान को लेकर मैंने सज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किये जाने का कोई विचार नहीं है।

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