नेताजी ने नहीं मानी बात तो शिवपाल थामेंगे कांग्रेस का हाथ

लखनऊ। समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल सिंह यादव नई पार्टी के गठन को लेकर जोड़तोड़ में लगे हैं। सपा के अध्यक्ष अखिलेश से मनमुटाव के चलते शिवपाल राजनीति की अलग राह तलाश रहे हैं। वे अपनी नई राह में अपने बड़े भाई और सपा के सरक्षक मुलायम सिंह यादव का भी साथ चाहते हैं।

वहीँ पिछले अनुभव को देखा जाए तो यह आसान नहीं दिखता कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव के समक्ष एक और नई पार्टी खड़ी कर उनके लिए मुश्किलें पैदा करें।

ऐसे में शिवपाल सिंह यादव के सामने दो ही विकल्प हैं या तो वे अकेले दम पर नई पार्टी बनायें या किसी और पार्टी का दामन थामें। स्वयं शिवपाल सिंह यादव ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वे कांग्रेस का हाथ थामने के बारे में भी सोच सकते हैं।

मंगलवार की सुबह पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य के साथ जिला कारागार पहुंचे शिवपाल सिंह यादव ने जेल में बंद अपने समर्थकों से मुलाकात की उनका हाल चाल जाना। उन्होंने काफी समय से जेल में बंद उमासिंह यादव के अलावा करीब बीस लोगों से मुलाकात की।

इस दौरान शिवपाल यादव ने कहा कि वह फरवरी में नई पार्टी या नए विकल्प का ऐलान कर सकते हैं। शिवपाल ने कहा अगर नेता जी  ने साथ दिया तो वह नई पार्टी का ऐलान करेंगे। शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि नेता जी साथ न आने पर वह कांग्रेस पार्टी में जा सकते हैं।

फ़िलहाल देखना है कि शिवपाल अपने कहे पर कितना खरे उतरते हैं। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव फरवरी तक इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। यदि प्रदेश के राजनैतिक समीकरणों को देखा जाए तो शिवपाल सिंह यादव के समक्ष अपनी पार्टी बनाने के अलावा बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ही दो विकल्प हैं।

जानकारों की माने तो शिवपाल बसपा में जाने की जगह कांग्रेस में जाना पसंद करेंगे। कांग्रेस में बलराम सिंह यादव के बाद कोई बड़ा यादव चेहरा नहीं है जो सपा के यादव वोटो में सेंध लगा सके। वहीँ शिवपाल के कांग्रेस में जाने से उत्तर प्रदेश के कुछ इलाको में कांग्रेस को बड़ा फायदा मिल सकता है। खासकर यदि शिवपाल के साथ उनके समर्थक विधायक, पूर्व विधायक और जिला पंचायत सदस्यों के कांग्रेस में आने से सपा को बड़ा झटका लग सकता है।

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