मुस्लिम शासको की धरोहरों पर सिर्फ मुसलमानो का हक,डालमिया से दोगुनी रकम देने को तैयार:जुनेदक़ाज़ी

न्यूयॉर्क। इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस (यूएसए) के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले को एडॉप्ट ए हेरिटेज स्कीम के तहत डालमिया ग्रुप को 25 करोड़ में दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाये हैं।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि मुस्लिम शासको द्वारा छोड़ी गयी धरोहरों की देखरेख का ज़िम्मा सिर्फ मुसलमानो को ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बहुत से ऐसे मुस्लिम उधोगपति हैं जो मुस्लिम शासको द्वारा बनायीं गयी इमारतों की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं।

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले को डालमिया ग्रुप को दिए जाने पर उठाते हुए जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि सरकार ने फैसला लेने से पहले किसी को विश्वास में नहीं लिया और न ही इसकी किसी को जानकारी दी गयी।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम शासको की धरोहरों की देखभाल कोई कॉर्पोरेट हॉउस कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि ताजमहल डालमिया ग्रुप को सौंपे जाने का निर्णय मुसलमानो के पूर्वजो के अपमान जैसा है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास प्राचीन धरोहरों की देखरेख करने के लिए पैसा नहीं है तो भी सरकार को चाहिए कि वह मुस्लिम शासको द्वारा छोड़ी गयी ऐतिहासिक इमारतों की देखभाल का जिम्मा सिर्फ मुसलमानो को ही दे।

जुनेद क़ाज़ी ने दोहराया कि यदि लाल किले की देखभाल डालमिया ग्रुप की जगह उन्हें दी गयी होती तो वे डालमिया ग्रुप से दो गुनी कीमत सरकार को देते। साथ ही कहा कि भारत में कई मुस्लिम उधोगपति और कारोबारी हैं जो आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न हैं और वे ऐतिहासिक इमारतों की देखरेख का जिम्मा संभाल सकते हैं।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह उन ऐतिहासिक इमारतों की सूची जारी करे जिनकी देखरेख करने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से देश के मुस्लिम उधोगपति और कारोबारी मुस्लिम शासको की धरोहरों की ज़िम्मेदारी लेने के लिए आगे आएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली का लाल किला कई मायनो में बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहाँ से स्वंत्रता दिवस का ध्वजारोहण होता है। उन्होंने कहा कि महज 25 करोड़ रुपयों के लिए इस ऐतिहासिक ईमारत को किसी कॉर्पोरेट घराने को नहीं दिया जाना चाहिए था।

बता दें कि केंद्र सरकार की ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ स्कीम के तहत लाल किला देश की ऐसी पहली ऐतिहासिक इमारत बन गया है जिसे डालमिया ग्रुप ने 5 साल के कॉन्ट्रेक्ट पर गोद लिया है।

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