दो वर्ष : 15 बड़े विवाद जिनसे मोदी सरकार की हुई फजीहत

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नई दिल्ली । भले ही केंद्र की नरेंन्द्र मोदी सरकार अपने दो साल के कायर्काल पर खुद ही अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन बीते दो सालो में कई मौके ऐसे आये जब न सिर्फ सरकार की फजीहत हुई बल्कि उसे कटघरे में भी खड़ा होना पड़ा ।

कई मौकों पर सरकार के मंत्रियों के बेतुके बयानों से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा वहीँ कुछ सांसदों के बयान से केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीयत पर सवाल उठने लगे ।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, रामशंकर कठेरिया, साध्वी निरंजन ज्योति, गिरिराज सिंह जैसे मंत्रियों ने अपने बयानों से सरकार के लिए मुश्किलें पैदा की वहीँ भाजपा सांसद योगी आदित्य नाथ, साक्षी महाराज जैसे सांसदों के सांप्रदायिक बयानो से सरकार की छवि धूमिल हुई । मोदी सरकार के दो साल के शासन में कई ऐसे मुद्दे आए, जिन पर विवाद हुए और सड़क से संसद तक हंगामा हुआ।

वे 15 विवाद जिनसे मोदी सरकार को उलझाए रखा

1- गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ तकरार। 10,000 से ज्यादा संगठनों के लाइसेंस रद्द। आरोप लगाया कि वे देशहित के खिलाफ काम कर रहे थे।

2- ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द करने पर विवाद। संगठन की कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई को लंदन जाने से रोका।

3- भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 में संशोधन के मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस के साथ टकराव। कई अध्यादेशों के बाद भी संशोधन विधेयक लंबित।

4- अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के अपने नाम लिखे सूट पहनने पर खासा विवाद। तब सूट की कीमत 10 लाख आंकी गई।

5- जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाने की कोशिश में न्यायपालिका से टकराव। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को अमान्य करार दिया।

6- बीफ का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बहस के केंद्र में। हिंसक घटनाओं ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं।

7- कथित बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में कई प्रतिष्ठित कलाकारों व लेखकों द्वारा अपने सम्मान की वापसी।

8- हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या पर चौतरफा आक्रोश। वेमुला के परिवार ने केंद्रीय मंत्रियों पर इसके लिए दोष मढ़ा।

9- देशद्रोही गतिविधियों के आरोप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों पर एफआईआर भी विवाद के केंद्र में।

10- भाजपा सदस्य व कलाकार गजेंद्र चौहान को भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान की कमान सौंपने पर विवाद। छात्रों का लंबा आंदोलन।

11- विवाद की जद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे भी। दोनों पर फरार क्रिकेट टाइकून ललित मोदी की मदद करने के आरोप।

12- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री पर उठे सवाल।

13- ईपीएफ निकासी पर टैक्स विवाद। ब्याज दर घटाने संबंधी प्रस्ताव पर भी कर्मचारियों की नाराजगी। बाद में प्रस्ताव वापस।

14- आभूषणों पर एक्साइज डय़ूटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर सर्राफा कारोबारियों का आंदोलन। सरकार अब भी अडिग।

15 – लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में बहुत लच्छेदार वादे किये थे लेकिन सरकार बनने के बाद भाजपा ही नहीं खुद पीएम नरेंद्र मोदी अपने कहे से यू टर्न लेते रहे । सरकार ने एक नहीं कई मौकों पर यू टर्न मारे । इससे सरकार की नकारत्मक छवि बनकर उभरी है ।

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